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SCERT:CHP-4(भारत में राष्ट्रवाद)

भारत में राष्ट्रवाद

Table of Contents

     


    परिभाषा

    • राष्ट्रवाद का अर्थ: राष्ट्र चेतना का उदय
    • ऐसी राष्ट्रीय चेतना जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकीकरण का भाव हो

    19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में स्थिति

    • भारत छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ
    • एकता के सूत्र का अभाव
    • समान न्याय व्यवस्था का अभाव
    • राष्ट्रीय एकता की भावना कमजोर

    19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में परिवर्तन

    • कई तत्वों के उदय से एकता बढ़ी
    • भारत एक संगठित राष्ट्र का रूप लेने लगा
    • राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति = स्वतंत्रता संग्राम

    राष्ट्रीय चेतना के उदय के कारण

    • अंग्रेजी शासन व्यवस्था का प्रभाव
    • ब्रिटिश शासन द्वारा राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक परिवर्तन
    • भारतीय समाज के सभी वर्गों का शोषण → असंतोष फैलना
    • अंग्रेजों के विकास कार्य (अपने लाभ के लिए लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से एकता में मददगार)

                 •डाक और तार व्यवस्था
                 •रेल
                 •छापेखाने (प्रिंटिंग प्रेस)
                 •समान प्रशासनिक व्यवस्था

    निष्कर्ष

    • अंग्रेजों के शासन ने जहाँ एक ओर शोषण किया, वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा किए गए कुछ विकास कार्यों ने राष्ट्रीय चेतना और एकता की नींव रखी।


    राष्ट्रवाद के उदय के कारण – राजनीतिक कारण

    मुख्य तथ्य

    • राष्ट्रवाद का उदय = अनेक कारणों का संयुक्त प्रभाव
    • अधिकतर कारण ब्रिटिश सरकार की साम्राज्यवादी और दमनकारी नीतियों से जुड़े

    1. ब्रिटिश शासन का केंद्रीकरण

    • 1858 – महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा → सभी देशी राज्य ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन
    • भारत को एक राष्ट्रीय स्वरूप मिला
    • सरकार ने राष्ट्रवाद को दबाने के लिए दमनकारी कदम उठाए

    2. दमनकारी कानून

    • 1878 – वर्नाक्युलर प्रेस ऐक्ट → भारतीय भाषाई प्रेस पर कठोर प्रतिबंध
    • 1879 – आर्म्स ऐक्ट → भारतीयों के लिए हथियार रखना गैर-कानूनी
    • 1883 – इलबर्ट बिल → भारतीय जज यूरोपीय पर मुकदमा सुन सके
    • ------> यूरोपीय विरोध के कारण बिल संशोधित
    • 1899 – कलकत्ता कॉरपोरेशन ऐक्ट → निर्वाचित सदस्यों की संख्या घटाई
    • 1904 – विश्वविद्यालय ऐक्ट → विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण
    • 1905 – बंगाल विभाजन (साम्प्रदायिक आधार पर) → भारी रोष, राष्ट्रवाद को बल
    • ------> 1911 में विभाजन रद्द
    • 1907 – देशद्रोही सभा अधिनियम → सभाओं पर प्रतिबंध
    • 1910 – इंडियन प्रेस ऐक्ट → राष्ट्रवादी लेखकों को दंड

    3. संरचनात्मक परिवर्तन

    • लार्ड डलहौजी की योजना: रेलवे ,टेलीग्राफ , संगठित परिवहन व्यवस्था
    • परिणाम: क्षेत्रों के बीच दूरी कम, स्थानीयता की भावना कमजोर , राष्ट्रीय एकता को बल

    4. अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव

    • प्रजातंत्र और आधुनिक प्रगति की जानकारी
    • मानवतावाद, व्यक्तिवाद का प्रसार
    • यूरोपीय पुनर्जागरण, फ्रांसीसी क्रांति, अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरणा
    • मोंटेस्क्यू, रूसो आदि के विचारों से प्रभावित
    • अधिकार और उत्तरदायित्व की समझ विकसित


    राष्ट्रवाद के उदय के कारण – आर्थिक कारण

    1. कृषि पर प्रभाव

    • ब्रिटिश कृषि नीति = अधिकतम भू-राजस्व वसूली
    • स्थायी बंदोबस्त
    • ------> जमींदार सरकार को निश्चित कर देते
    • ------> किसानों से उससे ज्यादा वसूली करते
    • नगदी फसलों (नील, कपास, गन्ना) की जबर्दस्ती खेती
    • अंग्रेज इन फसलों को अपने उद्योग के लिए कच्चा माल बनाते
    • कपास और नील किसान सबसे अधिक पीड़ित

    2. उद्योग पर प्रभाव

    • भारत में बने कपड़ों के निर्यात पर प्रतिबंध
    • इंग्लैंड के मशीन-निर्मित कपड़ों पर कोई कर नहीं
    • 1882 – सूती वस्त्रों पर से आयात कर हटा दिया गया
    • इंग्लैंड से मशीन-निर्मित सामान का आयात
    • भारत में औद्योगीकरण की धीमी गति (सरकार समर्थन नहीं करती थी)
    • परिणाम: कामगार बेरोजगार

    3. असंतोष और विद्रोह

    • अंग्रेजी शासन में कृषि और उद्योग – दोनों प्रभावित
    • समाज के हर वर्ग को कठिनाइयों का सामना
    • असंतोष धीरे-धीरे राष्ट्रीय चेतना में बदला
    • प्रमुख विद्रोह:

    • ------>1857 का विद्रोह
    • ------>नील विद्रोह
    • ------>पवना विद्रोह

    • निष्कर्ष:

    • ------>लक्ष्य की स्पष्टता
    • ------>मजबूत संगठन
    • ------>परिपक्व नेतृत्व
    • ------>सुनियोजित आंदोलन → स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग

    राष्ट्रवाद के उदय के कारण – सामाजिक कारण

    1. प्रजाति भेद की नीति

    • अंग्रेज स्वयं को श्रेष्ठ और भारतीयों को हीन मानते थे
    • विदेशों में भी भारतीयों के साथ भेदभाव (जैसे दक्षिण अफ्रीका में कानूनी प्रतिबंध)
    • भारत में भेदभाव के उदाहरण:
    • रेलगाड़ी में यात्रा से रोकना
    • क्लब, सड़क, होटल में दुर्व्यवहार
    • परिणाम: अंग्रेजों के प्रति घृणा और एकता की भावना

    2. सरकारी सेवाओं में भेदभाव

    • उच्च सरकारी पदों से भारतीयों को दूर रखना
    • इंडियन सिविल सर्विस (ICS) पर अंग्रेजों का कब्जा

    • परीक्षा की कठिनाई:

      आयोजन इंग्लैंड में
    • यात्रा और खर्च भारतीयों के लिए मुश्किल
    • यदि कोई भारतीय सफल हो भी गया, तो नियुक्ति में बाधा
    • उदाहरण: सुरेन्द्रनाथ बनर्जी को पद से हटाया गया

    3. परिणाम

    • शिक्षित एवं मध्यम वर्ग में असंतोष बढ़ा

    • अंग्रेजी शासन के खिलाफ राजनीतिक आवाज बुलंद हुई


    राष्ट्रवाद के उदय के कारण – धार्मिक कारण

    1. धर्म सुधार आंदोलन का योगदान

    • विश्व में राष्ट्रवाद के विकास में धर्म सुधार आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका

    • 19वीं शताब्दी में कई महापुरुषों ने सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाए

    • प्रमुख सुधारक:

      • राजा राम मोहन राय

      • देवेंद्रनाथ ठाकुर

      • ईश्वरचंद्र विद्यासागर

      • स्वामी दयानंद सरस्वती

      • रामकृष्ण परमहंस

      • स्वामी विवेकानंद

    2. यूरोपीय विद्वानों का योगदान

    • विलियम जोन्स, मैक्समूलर, चार्ल्स विल्किंसन आदि ने भारतीय धर्मग्रंथों का अंग्रेजी अनुवाद किया

    • परिणाम: भारतीयों में अपने धर्म और संस्कृति के प्रति गौरव और निष्ठा बढ़ी

    3. सुधारकों का प्रभाव

    • एकता, समानता और स्वतंत्रता का संदेश

    • भारतीय जनजीवन में नई चेतना का संचार

    • राष्ट्रवाद की भावना को बल मिला

    4. कांग्रेस का गठन और राजनीतिक चेतना

    • 1885 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन → राष्ट्रवाद का परिणाम

    • प्रारंभ में सुधारों की मांग

    • 1914 तक – अंग्रेजी सरकार की दमनकारी नीतियों से कांग्रेस उग्र हुई

    • बाल-पाल-लाल (बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय) के नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन का विस्तार

    • 1914 – प्रथम विश्व युद्ध, भारत को युद्धकारी देश घोषित किया गया


    प्रथम विश्वयुद्ध के कारण और परिणाम का भारत से अंतर्सम्बन्ध

    (क) प्रथम विश्वयुद्ध का संक्षिप्त परिचय

    • समय: 1914–1918

    • कारण: यूरोपीय देशों की औपनिवेशिक और साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा

    • पक्ष:

      • मित्र राष्ट्र – फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, (1917 से अमेरिका)

      • केन्द्रीय शक्तियाँ – जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, इटली

    • प्रभाव: विश्व की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर

    (ख) कारणों के साथ भारत का अंतर्सम्बन्ध

    • युद्ध औद्योगिक क्रांति और औपनिवेशिक व्यवस्था का परिणाम

    • ब्रिटेन के लिए भारत सबसे महत्वपूर्ण उपनिवेश → युद्ध में हर हाल में सुरक्षित रखना आवश्यक

    • ब्रिटिश सरकार की घोषणा: भारत में क्रमशः जिम्मेदार सरकार की स्थापना

    • 1916 – भारत में आयात शुल्क लगाया (कपड़ा उद्योग को बढ़ावा, लाभ अंग्रेजों को)

    (ग) प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत की स्थिति और घटनाक्रम

    1. आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव

    • युद्ध के साथ ही नयी आर्थिक व राजनीतिक स्थिति पैदा हुई → राष्ट्रवाद परिपक्व हुआ

    • तिलक और गांधी ने शुरू में युद्ध में ब्रिटिश सरकार का सहयोग किया (स्वराज के वादे पर भरोसा)

    • बाद में भ्रम टूटा

      • रक्षा व्यय में वृद्धि

      • करों का बोझ बढ़ा

      • महंगाई में तेज़ी

    2. प्रमुख राजनीतिक आंदोलन

    • 1915–17: एनी बेसेन्ट और तिलक ने होमरूल लीग आंदोलन शुरू किया (आयरलैंड से प्रेरित)

    • क्रांतिकारी आंदोलन का विस्तार – बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तरी भारत तक

    • विदेश में आंदोलन – 1913, लाला हरदयाल द्वारा गदर पार्टी की स्थापना (अमेरिका, कनाडा में)

    3. 1916 की दो महत्वपूर्ण घटनाएँ

    1. कांग्रेस के गरम दल और नरम दल का पुनः एक होना

    2. कांग्रेस–मुस्लिम लीग समझौता – साझा राजनीतिक आंदोलन का निर्णय

    4. गांधी का उदय

    • तीन सफल सत्याग्रह:

      • चम्पारण

      • खेड़ा

      • अहमदाबाद

    • गांधी भारतीय राजनीति के प्रमुख नेता बने


    (घ) प्रथम विश्वयुद्ध का भारत पर प्रभाव

    1. आर्थिक प्रभाव

    • युद्ध के बाद कीमतें बढ़ीं → आर्थिक गतिविधियाँ धीमी → शिक्षित भारतीय बेरोजगार

    • महंगाई चरम पर – मजदूर, दस्तकार, किसान सबसे अधिक प्रभावित

    • इंग्लैंड की अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त → भारत का आयात घटा → भारतीय उद्योग फले-फूले

    • युद्ध के बाद विदेशी पूंजी का पुनः प्रभाव बढ़ा → उद्योगपतियों ने विदेशी वस्तुओं पर शुल्क की मांग की

    • उद्योगपतियों ने समझा – केवल मजबूत राष्ट्रीय आंदोलन से ही आर्थिक हित सुरक्षित हो सकते हैं

    2. राजनीतिक प्रभाव

    • युद्धकालीन वादे – जनतंत्र और आत्मनिर्णय का अधिकार → लेकिन उपनिवेशों पर और कठोर नियंत्रण

    • रॉलेट एक्ट (1919) – बिना मुकदमे जेल

    • विरोध में जालियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) → पंजाब में मार्शल लॉ और अत्याचार

    3. संवैधानिक सुधार

    • मांटेग्यू–चेम्सफोर्ड सुधार/भारत सरकार अधिनियम 1919

      • प्रांतीय विधायी परिषदों का आकार बढ़ा

      • अधिकांश सदस्य चुने जाने लगे

      • केंद्र में दो सदन – लेजिस्लेटिव असेंबली और कौंसिल ऑफ स्टेट

    • लेकिन राष्ट्रवादी केवल स्वराज से ही संतुष्ट होने को तैयार → निर्णायक संघर्ष की तैयारी

    4. खिलाफत आंदोलन

    • प्रथम विश्वयुद्ध में ऑटोमन तुर्की (खलीफा) की हार

    • अफवाह – तुर्की पर सख्त संधि थोप दी जाएगी → भारतीय मुसलमान नाराज

    • लखनऊ समझौता (1916) से हिंदू–मुस्लिम एकता पहले ही बनी थी

    • गांधीजी ने खिलाफत मुद्दे को असहयोग आंदोलन का आधार बनाया

    5. सामाजिक-मानसिक प्रभाव

    • गोरों की प्रतिष्ठा घटी – दोनों पक्षों का एक-दूसरे पर प्रचार युद्ध → श्रेष्ठता का भय टूटा

    • उपनिवेशों में यूरोपीय प्रभुत्व का मानसिक असर कम हुआ

    6. गांधीवादी चरण की शुरुआत

    • गांधीजी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटे → साबरमती आश्रम की स्थापना

    • तीन प्रमुख आंदोलन:

      • चंपारण सत्याग्रह (किसान)

      • खेड़ा आंदोलन (किसान)

      • अहमदाबाद आंदोलन (श्रमिक)

    • कांग्रेस, होमरूल, मुस्लिम लीग नेताओं से नजदीकी

    • रॉलेट एक्ट के विरोध में पहला राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह शुरू किया


    रॉलेट एक्ट (1919) और विरोध में सत्याग्रह

    1. पृष्ठभूमि

    • बढ़ती क्रांतिकारी घटनाओं व असंतोष को दबाने के लिए लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने सिडनी रॉलेट समिति बनाई

    • समिति की सिफारिश – निरोधात्मक व दंडात्मक कठोर कानून

    2. रॉलेट एक्ट के प्रावधान

    • विशेष न्यायालय का गठन → निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं

    • अमान्य साक्ष्य और बिना वारंट गिरफ्तारी

    • उद्देश्य – क्रांतिकारी गतिविधियों का दमन

    3. विरोध

    • गांधीजी ने इसे स्वतंत्रता का हनन और मूल अधिकारों की हत्या कहा

    • सत्याग्रह सभा का गठन

    • 6 अप्रैल 1919 – देशव्यापी हड़ताल

    • कई जगह आंदोलन हिंसक → चरम पर जलियांवाला बाग हत्याकांड


    जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)

    1. पृष्ठभूमि

    • पंजाब में युद्ध-जनित असंतोष

    • 6 अप्रैल हड़ताल के बाद

    • 9 अप्रैल – डॉ. सत्यपाल और डॉ. किचलू गिरफ्तार

    • विरोध में सार्वजनिक सभा – जलियांवाला बाग, अमृतसर

    2. नरसंहार

    • जनरल डायर ने बिना चेतावनी सभा पर गोलियाँ चलवाईं

    • लगभग 1000 लोग मारे गए, कई घायल

    • बाद में मार्शल लॉ लगा, दमन बढ़ा

    3. प्रभाव

    • रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘नाइट’ की उपाधि छोड़ी

    • शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारिणी से इस्तीफा दिया

    • गांधीजी ने ‘कैसर-ए-हिन्द’ पदक लौटाया

    • राष्ट्रीय आंदोलन में नई ऊर्जा


    खिलाफत आन्दोलन (1919-1924)

    1. पृष्ठभूमि

    • प्रथम विश्वयुद्ध में तुर्की की हारऑटोमन साम्राज्य का विघटन

    • तुर्की के सुल्तान (खलीफा) को सत्ता से वंचित कर दिया गया

    • खलीफा मुस्लिम दुनिया का धार्मिक-राजनीतिक नेता → भारतीय मुसलमानों में असंतोष

    • ब्रिटेन पर वादा खिलाफी का आरोप

    2. शुरुआत

    • 1920 के प्रारंभ में भारतीय मुसलमानों ने ब्रिटेन पर दबाव बनाने हेतु आंदोलन शुरू किया

    • गांधीजी ने इसे हिन्दू-मुस्लिम एकता का अवसर माना

    • नवम्बर 1919 – गांधीजी अखिल भारतीय खिलाफत समिति के अध्यक्ष बने

    3. तीन सूत्री मांगें

    1. तुर्की के सुल्तान को पर्याप्त लौकिक अधिकार दिए जाएँ

    2. अरब प्रदेश मुस्लिम शासन (खलीफा) के अधीन हो

    3. खलीफा मुस्लिम पवित्र स्थलों का संरक्षक बने

    4. प्रमुख घटनाएँ

    • 17 अक्टूबर 1919 – पूरे भारत में खिलाफत दिवस मनाया गया

    • अमृतसर अधिवेशन (दिसम्बर 1919) – कांग्रेस का समर्थन

    • कलकत्ता अधिवेशन (सितम्बर 1920) – असहयोग आंदोलन का निर्णय (खिलाफत मुद्दा + पंजाब अत्याचार)

    • नागपुर अधिवेशन (दिसम्बर 1920) – स्वशासन की जगह स्वराज लक्ष्य तय


    असहयोग आन्दोलन (1920-22)

    1. कारण

    1. खिलाफत मुद्दा

    2. पंजाब में निर्दोषों की हत्या (जलियांवाला बाग)

    3. स्वराज की प्राप्ति

    2. कार्यक्रम

    (A) निषेधात्मक कार्य

    • उपाधि व अवैतनिक पद त्याग

    • सरकारी/गैर-सरकारी समारोहों का बहिष्कार

    • सरकारी स्कूल-कॉलेज बहिष्कार

    • विधान परिषद चुनाव बहिष्कार

    • विदेशी वस्त्र बहिष्कार

    • मेसोपोटामिया में नौकरी से इनकार

    (B) रचनात्मक कार्य

    • पंचायत व्यवस्था को बढ़ावा

    • राष्ट्रीय विद्यालय/कॉलेज स्थापना

    • स्वदेशी अपनाना, चरखा प्रचार

    • तिलक स्वराज कोष हेतु ₹1 करोड़ संग्रह

    • 20 लाख चरखों का वितरण


    असहयोग आन्दोलन का आरंभ और समापन (1921-1922)

    1. आरंभ

    • तारीख: 1 जनवरी 1921

    • नेतृत्व: महात्मा गांधी

    • विशेषताएँ:

      • विदेशी कपड़ों का बहिष्कार

      • छात्रों का सरकारी स्कूल-कॉलेजों से बहिष्कार

      • राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थानों की स्थापना:

        • जामिया मिलिया इस्लामिया

        • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय

        • काशी विद्यापीठ

      • मोतीलाल नेहरू, चितरंजन दास जैसे बड़े वकीलों ने वकालत छोड़ी

      • 17 नवम्बर 1921: प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत के विरुद्ध मुंबई में राष्ट्रव्यापी हड़ताल

    2. सरकारी प्रतिक्रिया

    • आन्दोलन गैरकानूनी घोषित

    • लगभग 30,000 कार्यकर्ता गिरफ्तार

    • गांधीजी ने सविनय अवज्ञा की चेतावनी दी

    3. चौरी-चौरा घटना (5 फरवरी 1922)

    • स्थान: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

    • कारण: पुलिस फायरिंग के विरोध में भीड़ ने थाना जला दिया

    • परिणाम: 22 पुलिसकर्मी मारे गए

    4. आन्दोलन स्थगन

    • गांधीजी ने हिंसा को देखते हुए 12 फरवरी 1922 को आन्दोलन रोक दिया

    • मार्च 1922 – गांधीजी गिरफ्तार, 6 वर्ष कारावास की सजा (रिहाई पहले हुई)

    5. परिणाम

    • खिलाफत मुद्दे का अंत

    • हिन्दू-मुस्लिम एकता टूटी, साम्प्रदायिकता बढ़ी

    • स्वराज व पंजाब के अन्याय का निवारण नहीं हो सका

    • उपलब्धियाँ:

      • गांधी व कांग्रेस में जनता का विश्वास

      • देशव्यापी राजनीतिक जागरूकता

      • हिन्दी को राष्ट्रव्यापी भाषा का दर्जा

      • चरखा और करघा का प्रचार


    साइमन कमीशन और नेहरू रिपोर्ट

    1. साइमन कमीशन (1927)

    • पृष्ठभूमि:

      • 1919 के भारत शासन अधिनियम (Government of India Act) में कहा गया था कि 10 साल बाद सुधारों की समीक्षा होगी।

      • ब्रिटिश सरकार ने समय से पहले नवंबर 1927 में Indian Statutory Commission का गठन किया।

    • संरचना:

      • 7 सदस्य, सभी अंग्रेज

      • अध्यक्ष: सर जॉन साइमन

    • उद्देश्य:

      • भारत में संवैधानिक सुधारों पर विचार

    • विरोध के कारण:

      • एक भी भारतीय सदस्य नहीं

      • भारत के स्वशासन पर विदेशियों का निर्णय

    • विरोध का स्वरूप:

      • 3 फरवरी 1928: बंबई आगमन पर काले झंडों, हड़तालों, प्रदर्शनों से स्वागत

      • नारा: "Simon Go Back" (साइमन वापस जाओ)

    • परिणाम:

      • देशव्यापी राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत

    2. नेहरू रिपोर्ट (1928)

    • कारण:

      • साइमन कमीशन के बहिष्कार के दौरान भारत सचिव लार्ड बिरकनहेड ने चुनौती दी कि भारतीय खुद ऐसा संविधान बनाएँ जिसे सभी दल स्वीकार करें।

    • सम्मेलन:

      • फरवरी 1928, दिल्ली — सर्वदलीय सम्मेलन

      • अध्यक्ष: मोतीलाल नेहरू

    • प्रमुख प्रस्ताव:

      • भारत को Dominion Status (डोमिनियन स्टेट) मिले

    • प्रतिक्रिया:

      • कांग्रेस के कुछ वर्ग असहमत

      • रिपोर्ट स्वीकृत नहीं हो सकी

      • सांप्रदायिकता की भावना खुलकर सामने आई (मुस्लिम लीग और हिन्दू महासभा के बीच मतभेद बढ़े)

    • परिणाम:

      • गांधीजी ने इससे निपटने के लिए सविनय अवज्ञा आन्दोलन की योजना प्रस्तुत की|


    सविनय अवज्ञा आन्दोलन के पृष्ठभूमि कारण (1929-30)

    3. विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929-30)

    • प्रभाव:

      • मूल्यों में अत्यधिक वृद्धि

      • भारत का निर्यात घटा, पर ब्रिटिश धन-निष्कासन जारी

      • अनेक कारखाने बंद, पूंजीपतियों की आर्थिक स्थिति खराब

      • किसान वर्ग पहले से ही गरीबी में — स्थिति और बिगड़ी

    • परिणाम:

      • पूरे देश में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ा

      • सविनय अवज्ञा आन्दोलन के लिए अनुकूल वातावरण

    4. समाजवाद का बढ़ता प्रभाव

    • स्थिति:

      • मार्क्सवादी और समाजवादी विचार तेजी से फैल रहे थे

      • कांग्रेस में भी इसका दबाव महसूस हुआ

      • वामपंथी धड़े का उदय — नेता: जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचन्द्र बोस

    • परिणाम:

      • वामपंथी दबाव को संतुलित करने के लिए नए आन्दोलन कार्यक्रम की आवश्यकता

    5. क्रांतिकारी आन्दोलनों का उभार

    • घटनाएँ:

      • मेरठ षड्यंत्र केस और लाहौर षड्यंत्र केस ने सरकार-विरोधी विचारधारा को उग्र किया

      • बंगाल में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की गतिविधियाँ पुनः उभरीं

      • अप्रैल 1930: चटगांव शस्त्रागार पर योजनाबद्ध हमला

        • नेता: सूर्यसेन (उपनाम: मास्टर दा)


    स्वतंत्रता घोषणा (महत्वपूर्ण अंश)

    • जन्मसिद्ध अधिकार:

      • अन्य राष्ट्रों की तरह स्वतंत्र रहना हमारा अधिकार है।

    • दमनकारी सरकार के बारे में मत:

      • यदि कोई सरकार अधिकार छीनकर प्रजा को सताती है, तो प्रजा को उसे बदलने या समाप्त करने का अधिकार है।

    • ब्रिटिश शासन की आलोचना:

      • भारतीयों के अधिकारों का अपहरण

      • गरीबों का आर्थिक शोषण

      • भारत का आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विनाश

    • मुख्य विश्वास:

      • भारत को अंग्रेजों से पूर्ण संबंध विच्छेद करना चाहिए।

      • ऐसे शासन के अधीन रहना मनुष्य और भगवान — दोनों के प्रति अपराध है।

    • संघर्ष का तरीका:

      • हिंसा के बजाय अहिंसा का मार्ग अपनाया जाएगा।

      • ब्रिटिश सरकार से स्वेच्छापूर्ण किसी भी प्रकार का सहयोग न करने की तैयारी।

      • आवश्यकता पड़ने पर सविनय अवज्ञा और करबंदी तक की तैयारी।


    पूर्ण स्वराज्य की मांग और दांडी यात्रा (1929–1930)

    6. पूर्ण स्वराज्य की मांग

    • लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929)

      • अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू

      • तिथि: 31 दिसंबर 1929, मध्यरात्रि

      • स्थान: रावी नदी का तट

      • नेहरू ने तिरंगा झंडा फहराया और स्वतंत्रता की घोषणा पढ़ी।

      • 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय।

      • पूरे देश में नया उत्साह और राष्ट्रीय भावना का संचार।

    7. गांधी का समझौतावादी रुख

    • आंदोलन शुरू करने से पहले गांधी ने वायसराय इरविन को 11 सूत्रीय मांग पत्र दिया।

    • शर्त: यदि मांगे मान ली जातीं, तो आंदोलन स्थगित।

    • परिणाम:

      • इरविन ने न केवल मांग ठुकराई, बल्कि गांधी से मिलने से भी इनकार किया।

      • सरकार ने दमनचक्र तेज़ कर दिया।

    • गांधी ने दांडी यात्रा से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।


    दांडी यात्रा (12 मार्च – 6 अप्रैल 1930)

    • शुरुआत: 12 मार्च 1930, साबरमती आश्रम से

    • यात्रा दूरी: 250 किमी, 24 दिन

    • गंतव्य: दांडी समुद्र तट

    • समापन: 5 अप्रैल 1930, दांडी पहुँचकर

    • कार्यवाही: 6 अप्रैल को समुद्र के पानी से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा।


    आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम

    1. नमक कानून का उल्लंघन — देशभर में।

    2. छात्र आंदोलन — स्कूल व कॉलेजों का बहिष्कार।

    3. विदेशी कपड़ों का बहिष्कार — कपड़ों की होली जलाना।

    4. करों का बहिष्कार — सरकार को कोई कर न देना।

    5. महिला भागीदारी — शराब की दुकानों के आगे धरना।

    6. वकील और कर्मचारी — अदालतें छोड़ना, पद त्यागना।

    7. स्वदेशी को बढ़ावा — घर-घर चरखा कातना और सूत बनाना।

    8. सत्य एवं अहिंसा का पालन — पूर्ण स्वराज्य का मूल आधार।


    नमक सत्याग्रह का प्रसार

    गांधीजी द्वारा दांडी में नमक कानून तोड़ने के बाद आंदोलन देशभर में फैल गया। विभिन्न क्षेत्रों में नेताओं ने स्थानीय स्तर पर नमक सत्याग्रह और संबंधित आंदोलनों का नेतृत्व किया।

    1. दक्षिण भारत

    • तमिलनाडु (तंजौर तट) — सी. राजगोपालाचारी ने त्रिचनापल्ली से वेदारण्य तक नमक यात्रा की।

    • मालाबार — के. केलप्पन ने कालीकट से पोथान्नूर तक नमक यात्रा की।

    2. उत्तर-पश्चिम भारत

    • पेशावर

      • नेता: खान अब्दुल गफ्फार खान (सीमांत गांधी / बादशाह खान)।

      • कार्य: सामाजिक व राजनीतिक सुधार, पठानों में राजनीतिक चेतना का प्रसार।

      • संगठन: खुदाई खिदमतगार (उर्फ लाल कुर्ती) की स्थापना।

    3. पश्चिम भारत

    • शोलापुर

      • गांधीजी की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ा विद्रोह।

      • हज़ारों मिल मजदूरों की भागीदारी के साथ हड़ताल।

    • धरासणा

      • नेता: सरोजिनी नायडू, इमाम साहब।

      • घटना: तीव्र सत्याग्रह, सरकार का व्यापक दमन।

    • गुजरात

      • विभिन्न ताल्लुकों में करबंदी आंदोलन शुरू।

    4. पूर्वी भारत

    • बंगाल — चौकीदारी व यूनियन बोर्ड विरोधी आंदोलन।

    • असम — छात्रों ने कनिंघम सर्कुलर के खिलाफ शक्तिशाली आंदोलन चलाया।

    • मणिपुर व नगालैंड — रानी गैडिनल्यू का प्रशंसनीय नेतृत्व।


    बिहार में आंदोलन का प्रसार

    • बिहार में समुद्र तट न होने के कारण चौकीदारी कर विरोधी आंदोलन प्रारंभ हुआ।

    • नेतृत्व:

      • सिवान: गंगा प्रसाद राय।

      • गया: चन्द्रवती देवी।

    • आंदोलन का विस्तार: गया, भागलपुर, मुंगेर, बाढ़, मोकामा, बड़हिया, बेगूसराय आदि।

    • छपरा जेल: कैदियों ने विदेशी वस्त्र पहनने से इंकार किया और नंगी हड़ताल की।

    • पटना: स्त्रियों का सक्रिय भागीदारी।

      • नेतृत्व: श्रीमती हसन इमाम → आगे बढ़ाया विंध्यवासिनी देवी ने।


    गांधी–इरविन समझौता (Delhi Pact)

    • तिथि: 5 मार्च 1931।

    • पक्ष: महात्मा गांधी व लार्ड इरविन।

    • परिणाम:

      • गांधीजी ने आंदोलन स्थगित किया।

      • गांधीजी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने को तैयार।

      • कुछ मांगें ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार कीं।

    • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन:

      • कोई महत्वपूर्ण सहमति नहीं बनी।

      • गांधीजी निराश लौटे।

    • वापसी के बाद: ब्रिटिश दमन तेज, गांधीजी ने आंदोलन पुनः शुरू किया।

      • पहले जैसा उत्साह नहीं, अंततः 1934 में आंदोलन समाप्त।

    सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रमुख परिणाम

    1. राष्ट्रीय आंदोलन का सामाजिक आधार विस्तृत — महिलाओं, मजदूरों, गरीबों, अशिक्षितों की भागीदारी।

    2. राजनीतिकरण — समाज के विभिन्न वर्गों में अंग्रेज-विरोधी भावना फैली।

    3. महिलाओं की भागीदारी — पहली बार बड़े पैमाने पर महिलाओं का सार्वजनिक जीवन में प्रवेश।

    4. आर्थिक बहिष्कार — ब्रिटिश आर्थिक हित प्रभावित, वस्त्र व अन्य आयात में गिरावट।

    5. नए संगठनात्मक तरीके

      • वानर सेना, मंजरी सेना, प्रभात फेरी, पत्र-पत्रिकाओं से जनजागरण।

    6. श्रमिक व कृषक आंदोलन पर प्रभाव

    7. 1935 का भारत शासन अधिनियम — एक प्रमुख राजनीतिक परिणाम।

    8. पहली बार कांग्रेस–ब्रिटिश सरकार में समान स्तर पर वार्ता


    किसान आंदोलन – पृष्ठभूमि

    • 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में बार-बार पड़ने वाले भीषण अकाल (1876–78, 1896–97, 1899–1900) से लाखों किसानों व गरीबों की मृत्यु।

    • कारण: अत्याचारी भूमि-कर नीति और अंग्रेजी भूराजस्व व्यवस्था।

    • परिणाम: कुछ टेनेंसी एक्ट बने, परंतु पर्याप्त सुधार नहीं हुआ।

    • 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद शुरुआती 20 वर्षों तक किसान समस्याओं पर ठोस कार्य नहीं।

    • गांधीजी के राजनीति में आने के बाद किसान आंदोलनों को नयी दिशा मिली।

    चम्पारण आंदोलन (1917)

    • समस्या: बिहार में नीलहे गोरे ‘तीनकठिया व्यवस्था’ लागू करते थे — किसानों को अपनी भूमि के 3/20 हिस्से पर जबरन नील की खेती करनी होती थी (अधिकांश उपजाऊ भूमि)।

    • नील की खेती से भूमि की उर्वरता घटती थी।

    • कृत्रिम नील के कारण अंतरराष्ट्रीय मांग कम हुई, लेकिन बागान मालिक मुनाफा बनाए रखने के लिए:

      • किसानों से मुआवजा वसूला।

      • लगान में अत्यधिक वृद्धि की।

    • नेतृत्व की शुरुआत:

      • 1916, कांग्रेस लखनऊ अधिवेशन में राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को चम्पारण आने का अनुरोध किया।

    • घटनाक्रम:

      1. गांधीजी मोतिहारी पहुँचे → सरकार ने उन्हें जिला छोड़ने का आदेश दिया।

      2. गांधीजी ने आदेश मानने से इनकार किया → गिरफ्तारी, पर मुकदमा वापस।

      3. गांधीजी को किसानों की समस्याओं की जांच की अनुमति मिली।

    • परिणाम:

      • सरकार ने चम्पारण एग्रेरियन कमेटी बनाई (गांधीजी सदस्य)।

      • सिफारिशें:

        • तीनकठिया व्यवस्था समाप्त।

        • अतिरिक्त कर समाप्त।

        • लगान में कमी।

        • अवैध वसूली का 25% किसानों को लौटाना।

      • 1919 में चम्पारण एग्रेरियन एक्ट लागू।

    • महत्व:

      • यह गांधीजी का पहला सत्य और अहिंसा आधारित आंदोलन → “चम्पारण सत्याग्रह”।

      • सहयोगी: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी, गोरख प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, भरनीधर प्रसाद।

      • स्थानीय महाजन और मुख्तियारों ने भी सहयोग किया।


    खेड़ा आंदोलन (1918)

    • पृष्ठभूमि:

      • गुजरात के खेड़ा जिले में 1917 की अधिक वर्षा से खरीफ की फसल नष्ट।

      • लगान कानून में ऐसी स्थिति में माफी का प्रावधान नहीं था।

      • किसानों की मांग: लगान माफ़ी।

      • सरकार ने आरोप लगाया कि बाहरी लोग किसानों को भड़का रहे हैं (निराधार आरोप)।

    • नेतृत्व: महात्मा गांधी।

    • घटनाक्रम:

      • 22 जून 1918 को गांधीजी ने सत्याग्रह का आह्वान किया।

      • एक महीने चला, फिर रबी की अच्छी फसल और सरकार द्वारा दमन कम होने पर आंदोलन समाप्त।

    • महत्व:

      • गुजरात के ग्रामीण किसानों में अंग्रेजी शोषणकारी कानूनों का विरोध करने का साहस जगा।

    मोपला विद्रोह (1921)

    • स्थान: मालाबार तट (आधुनिक केरल)।

    • कौन: मोपला (मुस्लिम पट्टेदार व खेतीहर) बनाम नम्बूदरी एवं नायर (हिंदू जमींदार)।

    • कारण:

      • बढ़ता लगान बोझ।

      • भूमि अधिकारों पर पाबंदी।

      • सरकारी संरक्षण जमींदारों को।

    • परिणाम:

      • असंतोष → किसान-जमींदार संघर्ष → साम्प्रदायिक हिंसा।

      • 1921 में कांग्रेस के भूमि व राजस्व सुधार समर्थन और खिलाफत आंदोलन से मोपला उत्साहित।

      • विद्रोहियों ने धार्मिक नेताओं और सरकारी संस्थाओं पर हमले किए।

      • अक्टूबर 1921: सैनिक कार्रवाई।

      • दिसम्बर तक 10,000+ विद्रोही मारे गए, 50,000+ गिरफ्तार।

      • विद्रोह समाप्त।


    बारडोली सत्याग्रह (1928)

    • स्थान: बारडोली, सूरत (गुजरात)।

    • कारण:

      • सरकार द्वारा लगान वृद्धि।

      • बारडोली जांच आयोग की सिफारिशों से किसान असंतुष्ट।

    • नेतृत्व: वल्लभभाई पटेल (यहीं से “सरदार” की उपाधि मिली)।

    • विशेषताएँ:

      • बुद्धिजीवियों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी।

      • बंबई में रेलवे हड़ताल।

      • K.M. मुन्शी और लालजी नारंगी ने बंबई विधान परिषद से त्यागपत्र।

    • परिणाम:

      • सरकार ने नई जांच समिति (ब्लूमफील्ड और मैक्सवेल) बनाई।

      • लगान वृद्धि को अनुचित घोषित किया, सरकार ने कमी की।

      • आंदोलन सफल।


    किसान सभा का गठन

    • उद्देश्य: किसानों को संगठित करना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना।

    • बिहार में प्रारंभ:

      • 1922–23: मुंगेर में शाह मुहम्मद जुबैर के नेतृत्व में किसान सभा।

      • 1928: स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बिहटा में स्थापना।

      • 1929: सोनपुर में पुनः विधिवत स्थापना।

      • उसी वर्ष सरदार पटेल का बिहार दौरा।

    • अखिल भारतीय किसान सभा:

      • अप्रैल 1936, लखनऊ में गठन।

    • बकास्त आंदोलन:

      • बिहार में शुरू, 1937 के कांग्रेस अधिवेशन में प्रमुख मांग के रूप में स्वीकार।

    • महत्व: किसानों की समस्याएँ राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्य धारा में शामिल हुईं।


    मज़दूर आंदोलन

    • प्रभाव के स्रोत:

      • यूरोप का औद्योगीकरण और मार्क्सवादी विचारधारा।

      • स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव।

      • रूसी क्रांति (1917), कम्युनिस्ट इंटरनेशनल और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना।

    • प्रमुख घटनाएँ:

      • 1917, अहमदाबाद:

        • प्लेग महामारी के बाद वेतन वृद्धि समाप्त → मजदूर असंतोष।

        • गांधीजी की मध्यस्थता → बोनस 35% पर बहाल।

      • 1920, AITUC की स्थापना:

        • 31 अक्टूबर 1920, कांग्रेस द्वारा "ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस"।

        • सी. आर. दास का सुझाव: किसानों व मजदूरों को राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी।

      • 1929, मेरठ षड्यंत्र केस:

        • वामपंथी नेताओं पर देशद्रोह का मुकदमा।

      • 1930–31, विभाजन:

        • AITUC → हिन्द मजदूर संघ, नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस।

      • नेताओं का समर्थन: नेहरू, सुभाष चंद्र बोस ने मजदूर मुद्दों का समर्थन जारी रखा।


    जनजातीय आंदोलन

    1. गोदावरी पहाड़ी विद्रोह (1916)

    • पृष्ठभूमि: पुराने मंपा प्रदेश में अशांति।

    • आगे की भूमिका: 1922–24 का बड़ा विद्रोह।

    2. रामपा विद्रोह (1922–24)

    • नेता: सीताराम राजू।

    • कारण:

      • साहूकारों का शोषण।

      • झूम खेती और सराय संबंधी पारंपरिक अधिकारों पर रोक (वन विभाग द्वारा)।

    • रणनीति: छापामार युद्ध।

    • परिणाम:

      • 6 मई 1924 को राजू गिरफ्तार और गोली से हत्या।

      • सितम्बर 1924 तक दमन।

    3. खोंड विद्रोह (1914, उड़ीसा)

    • कारण: सामंती रियासत दशपट्टा में उत्तराधिकार विवाद।

    • डर: विद्रोह का फैलाव कालाहांडी व बस्तर तक।

    • दमन: गांव जलाए गए, अंग्रेजों ने कठोर कार्रवाई की।

    4. उरांव आंदोलन (1914–1920, छोटानागपुर)

    • नेता: बतरा भगत।

    • अहिंसक आंदोलन।

    • सुधार: एकेश्वरवाद, मांस-मदिरा त्याग, नृत्यों से दूरी।

    • असहयोग आंदोलन का हिस्सा बना।

    5. अन्य विद्रोह:

    • 1917, मयूरभंज: संथाल विद्रोह।

    • 1917, मणिपुर: ‘घोडोई कुकियों’ का विद्रोह (दो वर्ष छापामार युद्ध)।

      • शिकायतें: "पोभांग" प्रथा (मुफ़्त मजदूरी) और झूम खेती पर प्रतिबंध।

    6. 1930, सविनय अवज्ञा आंदोलन:

    • पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के जनजातियों में राष्ट्रवादी भावना।

    7. 1942, भारत छोड़ो आंदोलन:

    • दक्षिणी बिहार के आदिवासियों में प्रबल राष्ट्रीय चेतना।


    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

    1. पृष्ठभूमि

    • 19वीं शताब्दी के अंत में भारत में राष्ट्रीय चेतना का उदय:

      • आधारभूत संरचनाओं का विकास।

      • आधुनिक शिक्षा का प्रसार।

      • समाचार पत्रों का विकास।

      • धार्मिक सुधार आंदोलनों का प्रभाव।

      • मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवियों का उत्थान।

      • यूरोप के राष्ट्रीय आंदोलनों से प्रेरणा।

    • महत्वपूर्ण पूर्ववर्ती संगठन:

      संगठन स्थापना वर्ष
      लैंडहोल्डर्स सोसाइटी 1838
      बंगाल ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन 1843
      ईस्ट इंडिया एसोसिएशन 1866
      पूना सार्वजनिक सभा 1870
      इंडियन लीग 1875
      इंडियन एसोसिएशन 1876
      मद्रास महाजन सभा 1884

    2. राष्ट्रवादी एकता की आवश्यकता

    • इंडियन एसोसिएशन द्वारा रेंट बिल, प्रेस अधिनियम और शस्त्र अधिनियम का विरोध।

    • इल्बर्ट बिल विवाद (लॉर्ड रिपन काल) ने संगठन की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।

    3. कांग्रेस स्थापना की प्रक्रिया

    • 1883: आनंद मोहन बोस द्वारा "नेशनल कॉन्फ्रेंस" सम्मेलन (कलकत्ता)।

    • 1884: ए. ओ. ह्यूम ने "भारतीय राष्ट्रीय संघ" की स्थापना।

    • 1885: प्रस्तावित बैठक पूना में, पर प्लेग के कारण स्थान बदला।

    • 28 दिसम्बर 1885: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बम्बई में बैठक।

      • अध्यक्ष: व्योमेशचंद्र बनर्जी

      • सदस्य: 72।

      • नाम: "अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" (Congress शब्द उत्तर अमेरिका से लिया गया, अर्थ – लोगों का समूह)।

    4. प्रारंभिक उद्देश्य

    1. भारत के विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना।

    2. देशवासियों में मित्रता और सद्भाव बढ़ाना, धर्म-जाति-प्रदेश आधारित विद्वेष समाप्त करना।

    3. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना।

    4. आवश्यक मुद्दों पर चर्चा कर प्रमाण तैयार करना।

    5. प्रार्थना पत्रों व स्मार पत्रों के माध्यम से शासन में सुधार लाने का प्रयास।

    5. आगे का विकास

    • 1905: बंगाल विभाजन → कांग्रेस में विरोध तेज।

    • 1907: कांग्रेस में फूट (मॉडरेट–एक्सट्रीमिस्ट विभाजन)।

    • गांधीजी का प्रवेश: कांग्रेस को पुनः मजबूती, राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व।

    • अंततः: कांग्रेस ने राष्ट्रीय एकता कायम कर स्वतंत्रता प्राप्ति में मुख्य भूमिका निभाई।


    वामपंथ और कम्युनिस्ट पार्टी

    1. शब्द का उद्भव

    • वामपंथी शब्द: प्रथम प्रयोग फ्रांसीसी क्रांति के दौरान।

    • बाद में: समाजवाद/साम्यवाद का पर्याय बन गया।

    2. भारत में साम्यवादी विचारों का प्रवेश

    • 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में बम्बई, कलकत्ता, कानपुर, लाहौर, मद्रास आदि में साम्यवादी सभाएँ।

    • प्रमुख व्यक्ति:

      • मुजफ्फर अहमद

      • एस. ए. डांगे

      • मौलवी बरकतुल्ला

      • गुलाम हुसैन

    • रूसी क्रांति (1917) की सफलता → विचारों का तेजी से फैलाव।

    3. महत्वपूर्ण घटनाएँ व संगठन

    वर्ष घटना
    1920 एम. एन. राय ने ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना।
    1920 A.I.T.U.C. (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस) की स्थापना।
    1922–23 पेशावर षड्यंत्र केस।
    1924 कानपुर षड्यंत्र केस।
    1925 सत्यभक्त ने भारत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी स्थापित की।
    1926 AITUC में विभाजन।
    1928 अखिल भारतीय मजदूर किसान पार्टी की स्थापना।
    1929 एन. एम. जोशी ने AITUF (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन फेडरेशन) बनाई।
    1929–33 मेरठ षड्यंत्र केस।
    1931 बिहार समाजवादी दल – जयप्रकाश नारायण।
    1934 बम्बई में कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना।

    4. सरकार से टकराव

    • असहयोग आंदोलन के दौरान साम्यवादी पत्र–पत्रिकाओं से प्रचार।

    • असहयोग के बाद → दमन नीति (षड्यंत्र केसों में मुकदमे)।

    • "पब्लिक सेफ्टी बिल" (कम्युनिस्ट विरोधी) को कांग्रेस ने पास नहीं होने दिया → साम्यवादियों को कांग्रेस का समर्थन।

    5. मजदूर व किसान आंदोलन में प्रभाव

    • मजदूर संघों में वामपंथ का प्रसार।

    • लेबर स्वराज पार्टी → भारत की पहली किसान–मजदूर पार्टी।

    • किसानों को साम्यवाद से जोड़ने की कोशिश।

    6. कांग्रेस में वामपंथ का असर

    • प्रभावशाली नेता: नेहरू, सुभाष बोस, लोहिया, जयप्रकाश नारायण, अच्यूत पटवर्धन, नरेन्द्र देव

    • कांग्रेस समाजवादी दल (1934) कांग्रेस के भीतर एक वामपंथी गुट के रूप में।

    7. कांग्रेस से अलगाव

    • सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान कांग्रेस पर उद्योगपति–जमींदार समर्थन का आरोप।

    • साम्यवादियों ने कांग्रेस और उसके वामपंथी गुट की आलोचना की।

    • संबंध तोड़ना → कांग्रेस में फूट का खतरा।

    • परिणाम: सुभाषचंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।


    मुस्लिम लीग

    1. पृष्ठभूमि

    • 1857 विद्रोह में हिन्दू–मुस्लिम एकता ने अंग्रेजों को चौंका दिया।

    • अंग्रेजों ने “फूट डालो और राज करो” नीति अपनाई।

    • 1887: लार्ड डफरिन ने कांग्रेस को “हिन्दुओं की पार्टी” कहा।

    • विलियम हंटर ने अंग्रेज–मुस्लिम मित्रता पर ज़ोर दिया।

    • कांग्रेस के राष्ट्रवादी नेताओं द्वारा धार्मिक प्रतीकों के प्रयोग से मुसलमानों में यह धारणा बनी कि कांग्रेस हिन्दू राज्य बनाना चाहती है।

    2. मुस्लिम जागरूकता व शिक्षा प्रसार

    • नेता: अब्दुल लतीफ़, आगा खाँ, सर सैयद अहमद ख़ाँ

    • 1877: सर सैयद अहमद ख़ाँ ने मोहम्मडन एंग्लो–ओरिएंटल कॉलेज (अलीगढ़) की स्थापना।

    3. बंगाल विभाजन और प्रभाव

    • 1905: लार्ड कर्जन ने बंगाल को पूर्वी बंगाल (मुस्लिम बहुल) और पश्चिमी बंगाल में विभाजित किया।

    • उद्देश्य: उग्र राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करना।

    • हिन्दू–मुस्लिम एकता से विरोध → 1911 में लार्ड हार्डिंग द्वारा विभाजन रद्द।

    4. मुस्लिम लीग की स्थापना

    • बंगाल विभाजन के विरोध से डरे अंग्रेज → मुसलमानों को कांग्रेस से अलग करने की योजना।

    • 1906 अक्टूबर: नवाब मोहसिन–उल–मुल्क, सर आगा खाँ के नेतृत्व में 35 मुस्लिम नेता लार्ड मिन्टो से मिले।

    • 30 दिसम्बर 1906, ढाका: नवाब सलीमुल्लाह ख़ाँ द्वारा बुलाई बैठक में “ऑल इंडिया मुस्लिम लीग” की स्थापना।

    5. उद्देश्य

    • सरकारी सेवाओं और न्यायिक पदों में मुसलमानों का उचित प्रतिनिधित्व।

    • विधान परिषद के लिए अलग निर्वाचक मंडल

    • काउंसिल नियुक्तियों में मुस्लिम हितों की रक्षा।

    6. प्रारंभिक स्थिति

    • 1909 के सुधार अधिनियम में अलग निर्वाचक मंडल की स्वीकृति → सांप्रदायिकता का बीज बोया गया।

    • 1916: कांग्रेस–लीग समझौता (लखनऊ पैक्ट) → राष्ट्रवादी मुसलमानों का कांग्रेस के साथ आंदोलन में भाग।

    • लीग को प्रारंभिक चुनावों में सीमित सफलता → मुस्लिम जनता में व्यापक आधार नहीं।

    7. जिन्ना के नेतृत्व में बदलाव

    • मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में कांग्रेस से अलगाव।

    • शासन में अलग प्रतिनिधित्व व क्षेत्रों की मांग।

    • परिणाम: भारत विभाजन का मार्ग प्रशस्त (अंग्रेजी नीति का योगदान)।


    स्वराज पार्टी

    1. स्थापना का कारण

    • 1922: असहयोग आंदोलन की अचानक वापसी से निराशा।

    • गया अधिवेशन (अध्यक्ष: चित्तरंजन दास) → प्रस्ताव कि कांग्रेस को चुनाव लड़कर विधान सभाओं में प्रवेश कर सरकारी काम में बाधा डालनी चाहिए (पारित नहीं हुआ)।

    • चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस पद त्यागकर स्वराज पार्टी बनाई।

    • मार्च 1923: इलाहाबाद में प्रथम स्वराज दल सम्मेलन।

    2. उद्देश्य व नीति

    • स्वराज प्राप्ति → लेकिन तरीका अलग।

    • 1919 के सुधार अधिनियम को बदलना या समाप्त करना।

    • विधानसभाओं में प्रवेश करके असहयोगात्मक रवैया अपनाना।

    • दमनकारी कानूनों का विरोध, नौकरशाही की शक्ति घटाना, आवश्यकता पड़ने पर त्यागपत्र देना।

    3. सफलताएँ

    • बजट प्रस्ताव अस्वीकार कराना।

    • 1919 सुधार अधिनियम पर जांच समिति गठित करवाना।

    4. गिरावट के कारण

    • सी. आर. दास की मृत्यु के बाद कुछ नेताओं का सरकार से सहयोग की ओर झुकाव।

    • चुनावों में हिन्दू सम्प्रदायवाद का सहारा → स्वराज पार्टी और हिन्दू महासभा में फर्क कम हुआ।

    • नीतियों पर दृढ़ न रहना, सांप्रदायिकता से दूरी न रखना → 1926 तक पार्टी पंगु।


    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)

    1. स्थापना और पृष्ठभूमि

    • स्थापना: 1925, नागपुर।
    • संस्थापक: डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार।
    • मुख्य अवधारणा: हिन्दू, हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्र।
    • यह विचार अचानक नहीं उभरा, बल्कि पहले से चल रहे हिन्दू पुनरुत्थान आंदोलन की परिणति थी।

    2. हिन्दू पुनरुत्थान का प्रारंभिक दौर

    • 1830: कलकत्ता में राधाकान्त द्वारा धर्मसभा की स्थापना (धार्मिक सुधार हेतु)।
    • 1875: स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना — नारा: “वेदों की ओर लौटो”
    • इस दौर में बेटों (ब्राह्मणों) की सर्वोच्चता, सनातन धर्म की पुनर्स्थापना और परंपराओं का महिमामंडन ज़ोरों पर था।

    3. कांग्रेस से असंतोष और धार्मिक राष्ट्रवाद

    • 1910–15 के बीच कांग्रेस की कार्यशैली से कुछ युवा नेता असंतुष्ट → उग्र राष्ट्रवाद का समर्थन।
    • राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में हिन्दू धार्मिक प्रतीकों का उपयोग (कबाल, पात्त, लाल आदि)।
    • धारणा: “हर हिन्दू पहले हिन्दू है, भारतीय बाद में” (लाला लालचंद)।
    • हिन्दू सभाओं, सनातन धर्म सभाओं, कुंभ मेलों आदि के माध्यम से संगठन।

    4. हिन्दू महासभा

    • 1915: पं. मदन मोहन मालवीय द्वारा हरिद्वार में स्थापना।
    • उद्देश्य: हिन्दू एकता को बढ़ावा, हिन्दुस्तान को हिन्दी और हिन्दुओं से जोड़ने का प्रचार।


    5. आर.एस.एस. का गठन

    • असहयोग आंदोलन वापसी (1922) के बाद साम्प्रदायिकता की लहर फिर तेज।
    • 1925: हेडगेवार ने RSS की स्थापना की।
    • उद्देश्य: हिन्दू युवकों को अनुशासन, चारित्रिक दृढ़ता और राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार करना।
    • सामाजिक संस्था के रूप में शुरुआत, पर इसमें राष्ट्र धर्म के साथ कट्टर हिन्दुत्व की शिक्षा दी जाती थी।


    6. ऐतिहासिक संदर्भ में महत्व

    • 1914–1930: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन चरम पर, गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की अग्रणी भूमिका।

    • इसी समय किसान सभाएँ, मजदूर संगठन, साम्यवादी दल, स्वराज पार्टी और RSS का गठन।

    • 1930 के बाद सभी दलों के आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को तेज गति दी।


    भारत में राष्ट्रवाद के विषय पर आधारित BPSC TRE 4 स्तर के लिए 20 प्रश्न निम्नलिखित हैं। ये प्रश्न दिए गए सामग्री पर आधारित हैं और विभिन्न पहलुओं जैसे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक कारणों, प्रमुख आंदोलनों, और संगठनों को कवर करते हैं। प्रत्येक प्रश्न के अंत में उत्तर और उसकी व्याख्या दी गई है।

    1. MOCK TEST:BPSC TRE 4 स्तर के लिए प्रश्न:1-20 

    1.19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत की स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

       a) भारत एक संगठित राष्ट्र था।  

       b) भारत छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था।  

       c) समान न्याय व्यवस्था लागू थी।  

       d) राष्ट्रीय एकता की भावना प्रबल थी।  


    2.राष्ट्रवाद के उदय में अंग्रेजी शासन के विकास कार्यों ने कैसे योगदान दिया?

       a) भारतीय समाज का शोषण करके  

       b) डाक, तार, रेल और छापेखाने की स्थापना करके  

       c) सामाजिक सुधारों को लागू करके  

       d) भारतीयों को उच्च सरकारी पदों पर नियुक्त करके  


    3.1878 के वर्नाक्युलर प्रेस ऐक्ट का उद्देश्य क्या था?

       a) भारतीय भाषाई प्रेस पर कठोर प्रतिबंध लगाना  

       b) भारतीय प्रेस को स्वतंत्रता देना  

       c) अंग्रेजी प्रेस को बढ़ावा देना  

       d) पत्रकारों को प्रशिक्षण देना  


    4.1905 में बंगाल विभाजन का क्या परिणाम हुआ?  

       a) राष्ट्रीय एकता कमजोर हुई  

       b) राष्ट्रवाद को बल मिला  

       c) साम्प्रदायिकता समाप्त हुई  

       d) ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ  


    5.लार्ड डलहौजी की योजनाओं ने राष्ट्रीय एकता को कैसे प्रभावित किया?

       a) क्षेत्रीयता को बढ़ावा दिया  

       b) रेलवे, टेलीग्राफ और परिवहन व्यवस्था के माध्यम से एकता को बल दिया  

       c) सामाजिक भेदभाव को बढ़ाया  

       d) भारतीय उद्योगों को नष्ट किया  


    6.ब्रिटिश कृषि नीति का भारतीय किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?

       a) किसानों की आय बढ़ी  

       b) नगदी फसलों की जबरन खेती कराई गई  

       c) भूमि कर समाप्त किया गया  

       d) किसानों को स्वतंत्रता दी गई  


    7.निम्नलिखित में से कौन सा विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष का परिणाम था?

       a) 1857 का विद्रोह  

       b) नील विद्रोह  

       c) पवना विद्रोह  

       d) उपरोक्त सभी  


    8.राष्ट्रवाद के उदय में सामाजिक कारणों में से एक क्या था?

       a) भारतीयों को उच्च सरकारी पदों पर नियुक्ति  

       b) अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ प्रजातीय भेदभाव  

       c) समान शिक्षा व्यवस्था का विकास  

       d) सामाजिक सुधारों का समर्थन  


    9.19वीं शताब्दी में धार्मिक सुधार आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले प्रमुख सुधारक कौन थे?

       a) राजा राम मोहन राय  

       b) स्वामी विवेकानंद  

       c) दोनों a और b  

       d) लाला लाजपत राय  


    10.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब और कहाँ हुई?

        a) 1885, बंबई  

        b) 1905, कलकत्ता  

        c) 1876, दिल्ली  

        d) 1916, लखनऊ  


    11.प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में कौन सा आंदोलन शुरू हुआ?

        a) असहयोग आंदोलन  

        b) होमरूल लीग आंदोलन  

        c) सविनय अवज्ञा आंदोलन  

        d) भारत छोड़ो आंदोलन  


    12.गांधीजी ने निम्नलिखित में से कौन सा सत्याग्रह सबसे पहले शुरू किया?

        a) चम्पारण सत्याग्रह  

        b) खेड़ा सत्याग्रह  

        c) अहमदाबाद सत्याग्रह  

        d) दांडी सत्याग्रह  

    13.जलियांवाला बाग हत्याकांड कब और कहाँ हुआ?

        a) 13 अप्रैल 1919, अमृतसर  

        b) 6 अप्रैल 1919, लाहौर  

        c) 13 अप्रैल 1920, दिल्ली  

        d) 5 मार्च 1931, बंबई  


    14.खिलाफत आंदोलन की शुरुआत का मुख्य कारण क्या था?

        a) प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार  

        b) बंगाल विभाजन  

        c) रॉलेट ऐक्ट  

        d) साइमन कमीशन  


    15.असहयोग आंदोलन का समापन क्यों हुआ?

        a) चौरी-चौरा घटना के कारण  

        b) गांधी-इरविन समझौते के कारण  

        c) साइमन कमीशन के कारण  

        d) नेहरू रिपोर्ट के कारण  


    16.साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?

        a) इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था  

        b) यह स्वराज की मांग को स्वीकार करने के लिए गठित हुआ  

        c) यह आर्थिक सुधारों के लिए था  

        d) इसमें केवल भारतीय सदस्य थे  


    17.नेहरू रिपोर्ट का मुख्य प्रस्ताव क्या था?

        a) पूर्ण स्वराज की मांग  

        b) भारत को डोमिनियन स्टेटस  

        c) बंगाल विभाजन को रद्द करना  

        d) रॉलेट ऐक्ट को समाप्त करना  


    18.दांडी यात्रा का उद्देश्य क्या था?

        a) नमक कानून तोड़ना  

        b) विदेशी कपड़ों का बहिष्कार  

        c) करों का विरोध  

        d) स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार  


    19. **चम्पारण सत्याग्रह का मुख्य परिणाम क्या था?**  

        a) तीनकठिया व्यवस्था समाप्त हुई  

        b) नमक कानून समाप्त हुआ  

        c) बंगाल विभाजन रद्द हुआ  

        d) रॉलेट ऐक्ट समाप्त हुआ  


    20. **स्वराज पार्टी की स्थापना का मुख्य कारण क्या था?**  

        a) असहयोग आंदोलन की वापसी से निराशा  

        b) साइमन कमीशन का विरोध  

        c) नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति  

        d) खिलाफत आंदोलन का समापन  

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    1. MOCK TEST:BPSC TRE 4 स्तर के लिए उत्तर और व्याख्या:1-20 

    1. उत्तर: b) भारत छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था।

       **व्याख्या:** 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था, जहाँ एकता के सूत्र और समान न्याय व्यवस्था का अभाव था। राष्ट्रीय एकता की भावना भी कमजोर थी।


    2. **उत्तर: b) डाक, तार, रेल और छापेखाने की स्थापना करके**  

       **व्याख्या:** अंग्रेजों ने अपने लाभ के लिए डाक, तार, रेल और छापेखाने की स्थापना की, जिसने अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्रों को जोड़कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया।


    3. **उत्तर: a) भारतीय भाषाई प्रेस पर कठोर प्रतिबंध लगाना**  

       **व्याख्या:** 1878 का वर्नाक्युलर प्रेस ऐक्ट भारतीय भाषाई प्रेस पर नियंत्रण लगाने के लिए लागू किया गया ताकि राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार रोका जा सके।


    4. **उत्तर: b) राष्ट्रवाद को बल मिला**  

       **व्याख्या:** 1905 में बंगाल विभाजन ने साम्प्रदायिक आधार पर जनता में रोष पैदा किया, जिसने स्वदेशी और राष्ट्रवादी आंदोलनों को बल दिया। 1911 में यह विभाजन रद्द हुआ।


    5. **उत्तर: b) रेलवे, टेलीग्राफ और परिवहन व्यवस्था के माध्यम से एकता को बल दिया**  

       **व्याख्या:** लार्ड डलहौजी की रेलवे, टेलीग्राफ और परिवहन व्यवस्था ने क्षेत्रीय दूरी को कम किया और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया।


    6. **उत्तर: b) नगदी फसलों की जबरन खेती कराई गई**  

       **व्याख्या:** ब्रिटिश कृषि नीति ने नील, कपास जैसी नगदी फसलों की जबरन खेती कराई, जिससे किसानों का शोषण हुआ और असंतोष बढ़ा।


    7. **उत्तर: d) उपरोक्त सभी**  

       **व्याख्या:** 1857 का विद्रोह, नील विद्रोह और पवना विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष के परिणाम थे, जो राष्ट्रवाद के उदय में योगदान दिए।


    8. **उत्तर: b) अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ प्रजातीय भेदभाव**  

       **व्याख्या:** अंग्रेजों की प्रजातीय भेदभाव नीति, जैसे रेल, क्लबों और होटलों में भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार, ने एकता और राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ाया।


    9. **उत्तर: c) दोनों a और b**  

       **व्याख्या:** राजा राम मोहन राय और स्वामी विवेकानंद दोनों ने 19वीं शताब्दी में धार्मिक और सामाजिक सुधार आंदोलनों का नेतृत्व किया, जो राष्ट्रवाद के लिए प्रेरक बने।


    10. **उत्तर: a) 1885, बंबई**  

        **व्याख्या:** भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई में हुई थी।


    11. **उत्तर: b) होमरूल लीग आंदोलन**  

        **व्याख्या:** प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान 1915-17 में एनी बेसेन्ट और तिलक ने होमरूल लीग आंदोलन शुरू किया।


    12. **उत्तर: a) चम्पारण सत्याग्रह**  

        **व्याख्या:** गांधीजी ने 1917 में चम्पारण सत्याग्रह शुरू किया, जो उनका पहला सत्याग्रह था, इसके बाद खेड़ा (1918) और अहमदाबाद सत्याग्रह हुए।


    13. **उत्तर: a) 13 अप्रैल 1919, अमृतसर**  

        **व्याख्या:** जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ, जब जनरल डायर ने निहत्थी सभा पर गोली चलवाई।


    14. **उत्तर: a) प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार**  

        **व्याख्या:** खिलाफत आंदोलन की शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार और खलीफा की सत्ता से वंचना के कारण हुई।


    15. **उत्तर: a) चौरी-चौरा घटना के कारण**  

        **व्याख्या:** 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा में हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया।


    16. **उत्तर: a) इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था**  

        **व्याख्या:** साइमन कमीशन (1927) में सभी सदस्य अंग्रेज थे, जिसके कारण इसका तीव्र विरोध हुआ और “Simon Go Back” का नारा दिया गया।


    17. **उत्तर: b) भारत को डोमिनियन स्टेटस**  

        **व्याख्या:** नेहरू रिपोर्ट (1928) में भारत को डोमिनियन स्टेटस देने का प्रस्ताव था, लेकिन यह स्वीकृत नहीं हुआ।


    18. **उत्तर: a) नमक कानून तोड़ना**  

        **व्याख्या:** दांडी यात्रा (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930) का उद्देश्य नमक कानून तोड़ना था, जो सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा था।


    19. **उत्तर: a) तीनकठिया व्यवस्था समाप्त हुई**  

        **व्याख्या:** चम्पारण सत्याग्रह (1917) के परिणामस्वरूप तीनकठिया व्यवस्था समाप्त हुई और किसानों को राहत मिली।


    20. **उत्तर: a) असहयोग आंदोलन की वापसी से निराशा**  

        **व्याख्या:** असहयोग आंदोलन (1922) की अचानक वापसी से निराशा के कारण चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी की स्थापना की।

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    भारत में राष्ट्रवाद के विषय पर आधारित BPSC TRE 4 स्तर के लिए 20 और प्रश्न निम्नलिखित हैं। ये प्रश्न पिछले प्रश्नों से भिन्न हैं और दिए गए सामग्री के विभिन्न पहलुओं जैसे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक कारणों, प्रमुख आंदोलनों, और संगठनों को कवर करते हैं। प्रत्येक प्रश्न के अंत में उत्तर और उसकी व्याख्या दी गई है।

    2. MOCK TEST:BPSC TRE 4 स्तर के लिए प्रश्न:1-20 

    1. **19वीं शताब्दी में राष्ट्रीय चेतना के उदय में निम्नलिखित में से किसका योगदान नहीं था?**  

       a) रेल और टेलीग्राफ व्यवस्था  

       b) ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ  

       c) भारतीयों को उच्च सरकारी पदों पर नियुक्ति  

       d) छापेखाने का विकास  


    2. **1879 के आर्म्स ऐक्ट का क्या प्रभाव पड़ा?**  

       a) भारतीयों को हथियार रखने की अनुमति दी गई  

       b) भारतीयों के लिए हथियार रखना गैर-कानूनी हुआ  

       c) हथियारों का आयात बढ़ा  

       d) ब्रिटिश सैनिकों को हथियार वितरित किए गए  


    3. **1883 के इलबर्ट बिल का क्या परिणाम हुआ?**  

       a) भारतीय जजों को यूरोपीय मामलों में सुनवाई का अधिकार मिला  

       b) यूरोपीय विरोध के कारण बिल संशोधित हुआ  

       c) बिल पूरी तरह लागू हुआ  

       d) बिल ने राष्ट्रवाद को कमजोर किया  


    4. **1904 के विश्वविद्यालय ऐक्ट का उद्देश्य क्या था?**  

       a) विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता को बढ़ावा देना  

       b) विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना  

       c) शिक्षा में सुधार करना  

       d) भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना  


    5. **अंग्रेजी शिक्षा ने राष्ट्रवाद के उदय में कैसे योगदान दिया?**  

       a) प्रजातंत्र और मानवतावाद के विचारों का प्रसार  

       b) भारतीयों को ब्रिटिश शासन के प्रति वफादार बनाया  

       c) सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा दिया  

       d) धार्मिक सुधारों को रोका  


    6. **ब्रिटिश आर्थिक नीतियों ने भारत में उद्योगों को कैसे प्रभावित किया?**  

       a) भारतीय उद्योगों को बढ़ावा दिया  

       b) मशीन-निर्मित सामान के आयात से उद्योगों का ह्रास हुआ  

       c) भारतीय कपड़ा उद्योग को कर-मुक्त किया  

       d) बेरोजगारी को समाप्त किया  


    7. **निम्नलिखित में से कौन सा सामाजिक कारण राष्ट्रवाद के उदय में शामिल था?**  

       a) भारतीयों को क्लब और होटलों में प्रवेश की अनुमति  

       b) अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार  

       c) समान सरकारी सेवाएँ प्रदान करना  

       d) उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना  


    8. **विलियम जोन्स और मैक्समूलर ने राष्ट्रवाद में कैसे योगदान दिया?**  

       a) भारतीय धर्मग्रंथों का अंग्रेजी अनुवाद करके  

       b) धार्मिक सुधार आंदोलन शुरू करके  

       c) भारतीयों को सरकारी नौकरियाँ प्रदान करके  

       d) सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व करके  


    9. **भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रारंभिक उद्देश्य क्या था?**  

       a) पूर्ण स्वराज की मांग  

       b) विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना  

       c) ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना  

       d) साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना  


    10. **प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में होमरूल लीग आंदोलन के नेता कौन थे?**  

        a) महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू  

        b) एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक  

        c) लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल  

        d) सुभाष चंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण  


    11. **1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच क्या समझौता हुआ?**  

        a) लखनऊ समझौता  

        b) दिल्ली समझौता  

        c) बंबई समझौता  

        d) कलकत्ता समझौता  


    12. **रॉलेट ऐक्ट का विरोध करने के लिए गांधीजी ने क्या किया?**  

        a) सत्याग्रह सभा का गठन  

        b) दांडी यात्रा शुरू की  

        c) असहयोग आंदोलन शुरू किया  

        d) खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया  


    13. **जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद किसने ‘नाइट’ की उपाधि लौटाई?**  

        a) महात्मा गांधी  

        b) रवीन्द्रनाथ टैगोर  

        c) जवाहरलाल नेहरू  

        d) सुभाष चंद्र बोस  


    14. **खिलाफत आंदोलन की तीन सूत्री मांगों में शामिल नहीं था:**  

        a) तुर्की के सुल्तान को लौकिक अधिकार  

        b) अरब प्रदेशों का मुस्लिम शासन  

        c) पूर्ण स्वराज की मांग  

        d) खलीफा को पवित्र स्थलों का संरक्षक बनाना  


    15. **असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यों में शामिल था:**  

        a) विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार  

        b) राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना  

        c) सरकारी नौकरियों का स्वीकार करना  

        d) विधान परिषदों में भाग लेना  


    16. **साइमन कमीशन का गठन कब हुआ था?**  

        a) 1927  

        b) 1919  

        c) 1930  

        d) 1905  


    17. **विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929-30) का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?**  

        a) निर्यात बढ़ा  

        b) असंतोष बढ़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए अनुकूल वातावरण बना  

        c) ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ  

        d) भारतीय उद्योगों को कर-मुक्त किया गया  


    18. **दांडी यात्रा कब शुरू हुई थी?**  

        a) 12 मार्च 1930  

        b) 6 अप्रैल 1930  

        c) 31 दिसंबर 1929  

        d) 26 जनवरी 1930  


    19. **चम्पारण सत्याग्रह में गांधीजी के सहयोगी कौन थे?**  

        a) राजकुमार शुक्ल और राजेन्द्र प्रसाद  

        b) सरोजिनी नायडू और इमाम साहब  

        c) जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस  

        d) एनी बेसेन्ट और तिलक  


    20. **स्वराज पार्टी की स्थापना किसने की थी?**  

        a) चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू  

        b) महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू  

        c) लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल  

        d) सुभाष चंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण  

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    2. MOCK TEST:BPSC TRE 4 स्तर के लिए उत्तर और व्याख्या: 1-20 

    1. **उत्तर: c) भारतीयों को उच्च सरकारी पदों पर नियुक्ति**  

       **व्याख्या:** 19वीं शताब्दी में रेल, टेलीग्राफ, छापेखाने और ब्रिटिश दमनकारी नीतियों ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया, लेकिन भारतीयों को उच्च सरकारी पदों पर नियुक्ति नहीं दी गई, जो राष्ट्रवाद का कारण नहीं था।


    2. **उत्तर: b) भारतीयों के लिए हथियार रखना गैर-कानूनी हुआ**  

       **व्याख्या:** 1879 का आर्म्स ऐक्ट भारतीयों के लिए हथियार रखने पर प्रतिबंध लगाता था, जिससे असंतोष बढ़ा और राष्ट्रवाद को बल मिला।


    3. **उत्तर: b) यूरोपीय विरोध के कारण बिल संशोधित हुआ**  

       **व्याख्या:** 1883 का इलबर्ट बिल भारतीय जजों को यूरोपीय मामलों में सुनवाई का अधिकार देता था, लेकिन यूरोपीय विरोध के कारण इसे संशोधित करना पड़ा।


    4. **उत्तर: b) विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना**  

       **व्याख्या:** 1904 का विश्वविद्यालय ऐक्ट विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के लिए लागू किया गया, जिससे राष्ट्रवादी विचारों का दमन हुआ।


    5. **उत्तर: a) प्रजातंत्र और मानवतावाद के विचारों का प्रसार**  

       **व्याख्या:** अंग्रेजी शिक्षा ने प्रजातंत्र, मानवतावाद, और यूरोपीय क्रांतियों के विचारों को फैलाया, जिसने भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना को जागृत किया।


    6. **उत्तर: b) मशीन-निर्मित सामान के आयात से उद्योगों का ह्रास हुआ**  

       **व्याख्या:** ब्रिटिश नीतियों ने इंग्लैंड से मशीन-निर्मित सामान के आयात को बढ़ावा दिया, जिससे भारतीय उद्योग, विशेषकर कपड़ा उद्योग, नष्ट हुए।


    7. **उत्तर: b) अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार**  

       **व्याख्या:** अंग्रेजों द्वारा रेल, क्लबों, और होटलों में भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार ने असंतोष और एकता की भावना को बढ़ाया, जो राष्ट्रवाद का कारण बना।


    8. **उत्तर: a) भारतीय धर्मग्रंथों का अंग्रेजी अनुवाद करके**  

       **व्याख्या:** विलियम जोन्स और मैक्समूलर जैसे यूरोपीय विद्वानों ने भारतीय धर्मग्रंथों का अंग्रेजी अनुवाद किया, जिससे भारतीयों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव बढ़ा।


    9. **उत्तर: b) विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना**  

       **व्याख्या:** भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रारंभिक उद्देश्य विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना था।


    10. **उत्तर: b) एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक**  

        **व्याख्या:** होमरूल लीग आंदोलन (1915-17) का नेतृत्व एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक ने किया, जो स्वराज की मांग को लेकर था।


    11. **उत्तर: a) लखनऊ समझौता**  

        **व्याख्या:** 1916 में लखनऊ समझौते के तहत कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने साझा राजनीतिक आंदोलन का निर्णय लिया, जिसने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया।


    12. **उत्तर: a) सत्याग्रह सभा का गठन**  

        **व्याख्या:** रॉलेट ऐक्ट (1919) के विरोध में गांधीजी ने सत्याग्रह सभा का गठन किया और 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।


    13. **उत्तर: b) रवीन्द्रनाथ टैगोर**  

        **व्याख्या:** जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के विरोध में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘नाइट’ की उपाधि लौटाई, जबकि गांधीजी ने ‘कैसर-ए-हिन्द’ पदक लौटाया।


    14. **उत्तर: c) पूर्ण स्वराज की मांग**  

        **व्याख्या:** खिलाफत आंदोलन की मांगें तुर्की के सुल्तान के अधिकार, अरब प्रदेशों का मुस्लिम शासन, और पवित्र स्थलों की रक्षा से संबंधित थीं, न कि पूर्ण स्वराज से।


    15. **उत्तर: b) राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना**  

        **व्याख्या:** असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यों में राष्ट्रीय विद्यालयों/कॉलेजों की स्थापना, स्वदेशी को बढ़ावा, और चरखा प्रचार शामिल था।


    16. **उत्तर: a) 1927**  

        **व्याख्या:** साइमन कमीशन का गठन नवंबर 1927 में भारत में संवैधानिक सुधारों की समीक्षा के लिए किया गया था।


    17. **उत्तर: b) असंतोष बढ़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए अनुकूल वातावरण बना**  

        **व्याख्या:** विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (1929-30) ने भारत में निर्यात घटाया, कारखाने बंद हुए, और असंतोष बढ़ा, जिसने सविनय अवज्ञा आंदोलन को बल दिया।

    18. **उत्तर: a) 12 मार्च 1930**  

        **व्याख्या:** दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ने के साथ समाप्त हुई।

    19. **उत्तर: a) राजकुमार शुक्ल और राजेन्द्र प्रसाद**  

        **व्याख्या:** चम्पारण सत्याग्रह (1917) में गांधीजी के सहयोगी राजकुमार शुक्ल, राजेन्द्र प्रसाद, और अन्य स्थानीय नेता थे।

    20. **उत्तर: a) चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू**  

        **व्याख्या:** असहयोग आंदोलन की वापसी (1922) से निराशा के कारण चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में स्वराज पार्टी की स्थापना की।

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    भारत में राष्ट्रवाद के विषय पर आधारित BPSC TRE 4 स्तर के लिए 10 अत्यंत कठिन प्रश्न निम्नलिखित हैं। ये प्रश्न गहन विश्लेषण, तथ्यात्मक समझ, और सामग्री के सूक्ष्म विवरणों पर आधारित हैं, जो परीक्षा में उच्च स्तर की तैयारी की मांग करते हैं। प्रत्येक प्रश्न के अंत में उत्तर और उसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है।

    3. MOCK TEST:BPSC TRE 4 स्तर HARD LEVEL के लिए प्रश्न:1-10 

    1. **19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में राष्ट्रवाद के उदय में ब्रिटिश शासन की केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था ने कैसे योगदान दिया, और इसका सबसे महत्वपूर्ण परिणाम क्या था?**  

       a) सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देकर  

       b) क्षेत्रीय भेदभाव को समाप्त करके  

       c) एक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करके  

       d) भारतीयों को शासन में भागीदारी देकर  


    2. **निम्नलिखित में से कौन सा कारक ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रवादी चेतना को सबसे अधिक प्रेरित करने वाला था?**  

       a) 1878 का वर्नाक्युलर प्रेस ऐक्ट और 1879 का आर्म्स ऐक्ट  

       b) 1905 का बंगाल विभाजन  

       c) 1904 का विश्वविद्यालय ऐक्ट  

       d) 1899 का कलकत्ता कॉरपोरेशन ऐक्ट  


    3. **लार्ड डलहौजी की रेलवे और टेलीग्राफ नीति ने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में कैसे योगदान दिया, और इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या रहा?**  

       a) स्थानीयता को बढ़ावा देकर  

       b) क्षेत्रीय दूरी को कम करके और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करके  

       c) सामाजिक भेदभाव को बढ़ाकर  

       d) आर्थिक शोषण को बढ़ाकर  


    4. **ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?**  

       a) स्थायी बंदोबस्त ने किसानों को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान की  

       b) नगदी फसलों की जबरन खेती ने भारतीय उद्योगों को बढ़ावा दिया  

       c) भारतीय कपड़ा उद्योग पर आयात कर हटाने से बेरोजगारी बढ़ी  

       d) ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय औद्योगीकरण को प्रोत्साहित किया  


    5. **19वीं शताब्दी में धार्मिक सुधार आंदोलनों ने राष्ट्रवाद को कैसे प्रभावित किया, और इसका सबसे महत्वपूर्ण परिणाम क्या था?**  

       a) सामाजिक कुरीतियों को बढ़ावा देकर  

       b) भारतीयों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव और एकता की भावना जागृत करके  

       c) धार्मिक भेदभाव को बढ़ाकर  

       d) ब्रिटिश शासन के प्रति वफादारी को प्रोत्साहित करके  


    6. **1916 के लखनऊ समझौते का राष्ट्रीय आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा, और यह किस प्रकार की एकता का प्रतीक था?**  

       a) हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बना और साझा राजनीतिक आंदोलन को बढ़ावा दिया  

       b) साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया  

       c) ब्रिटिश शासन को मजबूत किया  

       d) क्षेत्रीय संगठनों को कमजोर किया  


    7. **जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के बाद निम्नलिखित में से किसने सबसे पहले ब्रिटिश उपाधि त्यागी?**  

       a) महात्मा गांधी (‘कैसर-ए-हिन्द’)  

       b) रवीन्द्रनाथ टैगोर (‘नाइट’)  

       c) शंकरन नायर (वायसराय की कार्यकारिणी से इस्तीफा)  

       d) जवाहरलाल नेहरू  


    8. **खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के बीच क्या संबंध था, और इसका राष्ट्रीय आंदोलन पर सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव क्या था?**  

       a) दोनों आंदोलन स्वतंत्र रूप से चले और कोई प्रभाव नहीं पड़ा  

       b) गांधीजी ने खिलाफत मुद्दे को असहयोग आंदोलन का आधार बनाकर हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया  

       c) खिलाफत आंदोलन ने असहयोग आंदोलन को कमजोर किया  

       d) दोनों आंदोलनों ने ब्रिटिश शासन को मजबूत किया  


    9. **सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के दौरान दांडी यात्रा का रणनीतिक महत्व क्या था, और इसने राष्ट्रवादी आंदोलन को कैसे प्रभावित किया?**  

       a) यह केवल नमक कानून तोड़ने तक सीमित था  

       b) इसने देशव्यापी जन-आंदोलन को प्रेरित किया और ब्रिटिश शासन की वैधता को चुनौती दी  

       c) इसने साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया  

       d) इसने ब्रिटिश आर्थिक नीतियों को मजबूत किया  


    10. **चम्पारण सत्याग्रह (1917) की सफलता ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी की भूमिका को कैसे स्थापित किया?**  

        a) गांधीजी को ब्रिटिश शासन का समर्थक माना गया  

        b) इसने गांधीजी को अहिंसक सत्याग्रह के नेता के रूप में स्थापित किया  

        c) इसने गांधीजी को क्रांतिकारी नेता बनाया  

        d) इसने गांधीजी को साम्प्रदायिक नेता के रूप में स्थापित किया  

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    3. MOCK TEST:BPSC TRE 4 स्तर HARD LEVEL के लिए उत्तर और व्याख्या:1-10 

    1. **उत्तर: c) एक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करके**  

       **व्याख्या:** ब्रिटिश शासन की केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था, विशेषकर 1858 की महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा के बाद, ने भारत को एक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। सभी देशी राज्य ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आए, जिसने अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया। इसका सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह था कि भारत एक संगठित राष्ट्र के रूप में उभरने लगा।


    2. **उत्तर: b) 1905 का बंगाल विभाजन**  

       **व्याख्या:** 1905 का बंगाल विभाजन साम्प्रदायिक आधार पर किया गया, जिसने भारतीयों में व्यापक रोष पैदा किया। इसने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों को जन्म दिया, जो राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित करने में सबसे प्रभावी सिद्ध हुआ, क्योंकि इसने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया और राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी।


    3. **उत्तर: b) क्षेत्रीय दूरी को कम करके और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करके**  

       **व्याख्या:** लार्ड डलहौजी की रेलवे और टेलीग्राफ नीति ने क्षेत्रीय दूरी को कम किया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे के निकट आए। इसका दीर्घकालिक प्रभाव यह रहा कि स्थानीयता की भावना कमजोर हुई और राष्ट्रीय एकता की भावना को बल मिला, जिसने राष्ट्रवादी आंदोलनों को गति प्रदान की।


    4. **उत्तर: c) भारतीय कपड़ा उद्योग पर आयात कर हटाने से बेरोजगारी बढ़ी**  

       **व्याख्या:** ब्रिटिश नीतियों ने 1882 में सूती वस्त्रों पर आयात कर हटा दिया, जिससे इंग्लैंड के मशीन-निर्मित कपड़ों का आयात बढ़ा। इससे भारतीय कपड़ा उद्योग नष्ट हुआ, बेरोजगारी बढ़ी, और आर्थिक असंतोष ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि स्थायी बंदोबस्त और नगदी फसलों ने शोषण को बढ़ाया, न कि स्वतंत्रता या औद्योगीकरण को।


    5. **उत्तर: b) भारतीयों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव और एकता की भावना जागृत करके**  

       **व्याख्या:** राजा राम मोहन राय, स्वामी विवेकानंद आदि के धार्मिक सुधार आंदोलनों ने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और भारतीयों में अपनी संस्कृति व धर्म के प्रति गौरव बढ़ाया। इसका सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह था कि भारतीयों में एकता और स्वतंत्रता की भावना जागृत हुई, जो राष्ट्रवाद का आधार बनी।


    6. **उत्तर: a) हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बना और साझा राजनीतिक आंदोलन को बढ़ावा दिया**  

       **व्याख्या:** 1916 का लखनऊ समझौता कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया। इसने साझा राजनीतिक मांगों, जैसे स्वशासन, को आगे बढ़ाया और राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूती प्रदान की। यह एकता खिलाफत और असहयोग आंदोलनों में भी दिखाई दी।


    7. **उत्तर: b) रवीन्द्रनाथ टैगोर (‘नाइट’)**  

       **व्याख्या:** जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के विरोध में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले अपनी ‘नाइट’ की उपाधि लौटाई। शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारिणी से इस्तीफा दिया, और गांधीजी ने बाद में ‘कैसर-ए-हिन्द’ पदक लौटाया। जवाहरलाल नेहरू ने कोई उपाधि नहीं लौटाई।


    8. **उत्तर: b) गांधीजी ने खिलाफत मुद्दे को असहयोग आंदोलन का आधार बनाकर हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया**  

       **व्याख्या:** गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन (1919-24) को असहयोग आंदोलन (1920-22) का हिस्सा बनाया, जिससे हिंदू-मुस्लिम एकता को बल मिला। इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव यह था कि राष्ट्रीय आंदोलन में व्यापक जन-भागीदारी बढ़ी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुटता मजबूत हुई।


    9. **उत्तर: b) इसने देशव्यापी जन-आंदोलन को प्रेरित किया और ब्रिटिश शासन की वैधता को चुनौती दी**  

       **व्याख्या:** दांडी यात्रा (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930) नमक कानून तोड़ने का प्रतीकात्मक कदम था, जिसने पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रेरित किया। इसने ब्रिटिश शासन की वैधता को चुनौती दी और जनता में स्वराज की भावना को जागृत किया, जिससे राष्ट्रीय आंदोलन को अभूतपूर्व गति मिली।


    10. **उत्तर: b) इसने गांधीजी को अहिंसक सत्याग्रह के नेता के रूप में स्थापित किया**  

        **व्याख्या:** चम्पारण सत्याग्रह (1917) गांधीजी का पहला अहिंसक आंदोलन था, जिसमें तीनकठिया व्यवस्था समाप्त हुई। इसने गांधीजी को अहिंसा और सत्याग्रह के राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित किया, जिसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि यह न तो क्रांतिकारी था और न ही साम्प्रदायिक।

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    4. भारत में राष्ट्रवाद पर आधारित 20 अत्यंत कठिन प्रश्न (BPSC TRE 4)

    प्रश्न:

    1. 1878 में लागू वर्नाक्युलर प्रेस ऐक्ट का प्राथमिक उद्देश्य क्या था, और इसका राष्ट्रवादी आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
      a) भारतीय प्रेस को स्वतंत्रता देना
      b) भारतीय भाषाई प्रेस पर नियंत्रण लगाना
      c) अंग्रेजी प्रेस को बढ़ावा देना
      d) धार्मिक सुधारों को प्रोत्साहित करना

    2. 1879 के आर्म्स ऐक्ट की तिथि और इसका भारतीय समाज पर प्रभाव क्या था?
      a) 1878, भारतीयों को हथियार रखने की अनुमति
      b) 1879, भारतीयों के लिए हथियार रखना गैर-कानूनी
      c) 1883, हथियारों का आयात बढ़ाना
      d) 1905, ब्रिटिश सैनिकों को हथियार वितरण

    3. 1883 में इलबर्ट बिल विवाद की तिथि और इसका परिणाम क्या रहा?
      a) 1878, बिल लागू हुआ
      b) 1883, यूरोपीय विरोध के कारण बिल संशोधित
      c) 1904, बिल ने राष्ट्रवाद को कमजोर किया
      d) 1919, बिल पूरी तरह लागू हुआ

    4. 1904 के विश्वविद्यालय ऐक्ट की तिथि और इसका राष्ट्रवादी विचारों पर प्रभाव क्या था?
      a) 1904, विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता को बढ़ावा
      b) 1904, विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा
      c) 1905, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा
      d) 1916, शिक्षा सुधारों को लागू करना

    5. 1905 में बंगाल विभाजन की तिथि और इसका राष्ट्रवादी आंदोलन पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या था?
      a) 1904, साम्प्रदायिकता को समाप्त किया
      b) 1905, स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को प्रेरित किया
      c) 1911, राष्ट्रीय एकता को कमजोर किया
      d) 1919, ब्रिटिश शासन को मजबूत किया

    6. 1919 में रॉलेट ऐक्ट के प्रावधानों में शामिल था:
      a) विशेष न्यायालयों का गठन और बिना अपील का अधिकार
      b) भारतीयों को हथियार रखने की अनुमति
      c) स्वराज की मांग को स्वीकार करना
      d) प्रेस की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना

    7. रॉलेट ऐक्ट (1919) के विरोध में गांधीजी ने कौन सा कदम उठाया, और इसकी शुरुआत की तिथि क्या थी?
      a) सत्याग्रह सभा का गठन, 6 अप्रैल 1919
      b) दांडी यात्रा, 12 मार्च 1930
      c) असहयोग आंदोलन, 1 जनवरी 1921
      d) खिलाफत आंदोलन, 17 अक्टूबर 1919

    8. जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) की पृष्ठभूमि में शामिल था:
      a) 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल
      b) 1905 में बंगाल विभाजन
      c) 1916 में लखनऊ समझौता
      d) 1930 में दांडी यात्रा

    9. जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के बाद निम्नलिखित में से किसने ‘कैसर-ए-हिन्द’ पदक लौटाया?
      a) रवीन्द्रनाथ टैगोर
      b) महात्मा गांधी
      c) शंकरन नायर
      d) जवाहरलाल नेहरू

    10. खिलाफत आंदोलन की शुरुआत की सटीक तिथि और इसका प्राथमिक कारण क्या था?
      a) 17 अक्टूबर 1919, तुर्की की हार और खलीफा की सत्ता से वंचना
      b) 6 अप्रैल 1919, रॉलेट ऐक्ट का विरोध
      c) 1 जनवरी 1921, स्वराज की मांग
      d) 12 मार्च 1930, नमक कानून का उल्लंघन

    11. राजा राम मोहन राय ने 19वीं शताब्दी में कौन सा सुधार आंदोलन शुरू किया, और इसका राष्ट्रवाद पर प्रभाव क्या था?
      a) आर्य समाज, धार्मिक एकता को बढ़ावा
      b) ब्रह्म समाज, सामाजिक कुरीतियों का विरोध और राष्ट्रीय चेतना
      c) प्रार्थना समाज, साम्प्रदायिकता को बढ़ावा
      d) थियोसोफिकल सोसाइटी, ब्रिटिश शासन का समर्थन

    12. स्वामी विवेकानंद के सुधार आंदोलन की स्थापना की तिथि और इसका योगदान क्या था?
      a) 1897, रामकृष्ण मिशन, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव
      b) 1875, आर्य समाज, वेदों की ओर लौटना
      c) 1828, ब्रह्म समाज, सामाजिक सुधार
      d) 1885, कांग्रेस, राजनीतिक एकता

    13. 1915-17 में होमरूल लीग आंदोलन की शुरुआत किस तिथि को हुई, और इसके प्रमुख नेता कौन थे?
      a) 1915, एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक
      b) 1916, गांधीजी और नेहरू
      c) 1919, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल
      d) 1920, सुभाष चंद्र बोस और जयप्रकाश नारायण

    14. 1919 के रॉलेट ऐक्ट के विरोध में 6 अप्रैल 1919 को क्या हुआ, और इसका परिणाम क्या था?
      a) देशव्यापी हड़ताल, जलियांवाला बाग हत्याकांड
      b) दांडी यात्रा, नमक कानून का उल्लंघन
      c) असहयोग आंदोलन, स्वराज की प्राप्ति
      d) खिलाफत आंदोलन, हिंदू-मुस्लिम एकता

    15. जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के बाद पंजाब में क्या हुआ?
      a) स्वराज की घोषणा
      b) मार्शल लॉ लागू और दमन बढ़ा
      c) बंगाल विभाजन रद्द हुआ
      d) गांधी-इरविन समझौता

    16. 1907 के देशद्रोही सभा अधिनियम का उद्देश्य क्या था, और इसका राष्ट्रवादी आंदोलन पर प्रभाव क्या था?
      a) सभाओं पर प्रतिबंध, राष्ट्रवादी सभाओं का दमन
      b) सभाओं को स्वतंत्रता, आंदोलन को बढ़ावा
      c) प्रेस की स्वतंत्रता, विचारों का प्रसार
      d) धार्मिक सुधार, एकता को बढ़ावा

    17. 1910 के इंडियन प्रेस ऐक्ट की तिथि और इसका प्राथमिक लक्ष्य क्या था?
      a) 1905, प्रेस को स्वतंत्रता देना
      b) 1910, राष्ट्रवादी लेखकों को दंडित करना
      c) 1919, धार्मिक लेखन को बढ़ावा
      d) 1920, प्रेस की सेंसरशिप समाप्त करना

    18. चम्पारण सत्याग्रह (1917) की शुरुआत की तिथि और इसका प्रमुख परिणाम क्या था?
      a) 1916, तीनकठिया व्यवस्था समाप्त
      b) 1917, तीनकठिया व्यवस्था समाप्त
      c) 1918, नमक कानून का उल्लंघन
      d) 1919, रॉलेट ऐक्ट का विरोध

    19. खेड़ा आंदोलन (1918) की शुरुआत की तिथि और इसका प्रमुख कारण क्या था?
      a) 1917, नील की खेती का विरोध
      b) 1918, लगान माफी की मांग
      c) 1919, रॉलेट ऐक्ट का विरोध
      d) 1920, स्वराज की मांग

    20. असहयोग आंदोलन की शुरुआत की सटीक तिथि और इसका समापन क्यों हुआ?
      a) 1 जनवरी 1921, चौरी-चौरा घटना (5 फरवरी 1922)
      b) 6 अप्रैल 1919, जलियांवाला बाग हत्याकांड
      c) 12 मार्च 1930, गांधी-इरविन समझौता
      d) 17 अक्टूबर 1919, खिलाफत आंदोलन


    4. उत्तर और व्याख्या:

    1. उत्तर: b) भारतीय भाषाई प्रेस पर नियंत्रण लगाना
      व्याख्या: 1878 का वर्नाक्युलर प्रेस ऐक्ट भारतीय भाषाई प्रेस पर कठोर प्रतिबंध लगाने के लिए लागू किया गया ताकि राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार रोका जा सके। इसने भारतीयों में असंतोष बढ़ाया, जिसने राष्ट्रवादी आंदोलन को बल दिया।

    2. उत्तर: b) 1879, भारतीयों के लिए हथियार रखना गैर-कानूनी
      व्याख्या: 1879 के आर्म्स ऐक्ट ने भारतीयों के लिए हथियार रखना गैर-कानूनी कर दिया, जिससे असंतोष और ब्रिटिश शासन के खिलाफ भावना बढ़ी, जो राष्ट्रवाद का एक कारण बनी।

    3. उत्तर: b) 1883, यूरोपीय विरोध के कारण बिल संशोधित
      व्याख्या: 1883 का इलबर्ट बिल भारतीय जजों को यूरोपीय मामलों में सुनवाई का अधिकार देता था, लेकिन यूरोपीय विरोध के कारण इसे संशोधित करना पड़ा, जिसने भारतीयों में असंतोष और राष्ट्रवादी भावना को बढ़ाया।

    4. उत्तर: b) 1904, विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा
      व्याख्या: 1904 का विश्वविद्यालय ऐक्ट विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के लिए लागू किया गया, जिसने राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार को दबाने का प्रयास किया और असंतोष को बढ़ाया।

    5. उत्तर: b) 1905, स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को प्रेरित किया
      व्याख्या: 1905 में बंगाल विभाजन ने साम्प्रदायिक आधार पर रोष पैदा किया, जिसने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों को जन्म दिया। इसका दीर्घकालिक प्रभाव यह था कि राष्ट्रवादी आंदोलन को व्यापक जन-समर्थन मिला।

    6. उत्तर: a) विशेष न्यायालयों का गठन और बिना अपील का अधिकार
      व्याख्या: रॉलेट ऐक्ट (1919) ने विशेष न्यायालयों का गठन किया, जिनके निर्णय के खिलाफ अपील का अधिकार नहीं था, और बिना वारंट गिरफ्तारी की अनुमति दी, जिसने स्वतंत्रता का हनन किया।

    7. उत्तर: a) सत्याग्रह सभा का गठन, 6 अप्रैल 1919
      व्याख्या: रॉलेट ऐक्ट (1919) के विरोध में गांधीजी ने सत्याग्रह सभा का गठन किया और 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी।

    8. उत्तर: a) 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल
      व्याख्या: जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) की पृष्ठभूमि में 6 अप्रैल 1919 की देशव्यापी हड़ताल और डॉ. सत्यपाल व किचलू की गिरफ्तारी शामिल थी, जिसने अमृतसर में विरोध को भड़काया।

    9. उत्तर: b) महात्मा गांधी
      व्याख्या: जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के विरोध में महात्मा गांधी ने ‘कैसर-ए-हिन्द’ पदक लौटाया, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘नाइट’ की उपाधि लौटाई।

    10. उत्तर: a) 17 अक्टूबर 1919, तुर्की की हार और खलीफा की सत्ता से वंचना
      व्याख्या: खिलाफत आंदोलन की शुरुआत 17 अक्टूबर 1919 को हुई, जब प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार और खलीफा की सत्ता से वंचना के कारण भारतीय मुसलमानों में असंतोष फैला।

    11. उत्तर: b) ब्रह्म समाज, सामाजिक कुरीतियों का विरोध और राष्ट्रीय चेतना
      व्याख्या: राजा राम मोहन राय ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसने सती प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया और भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया।

    12. उत्तर: a) 1897, रामकृष्ण मिशन, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव
      व्याख्या: स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसने भारतीय संस्कृति और धर्म के प्रति गौरव को बढ़ाया, जो राष्ट्रवाद का आधार बना।

    13. उत्तर: a) 1915, एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक
      व्याख्या: होमरूल लीग आंदोलन 1915 में शुरू हुआ, और इसके प्रमुख नेता एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक थे, जिन्होंने स्वराज की मांग को प्रबल किया।

    14. उत्तर: a) देशव्यापी हड़ताल, जलियांवाला बाग हत्याकांड
      व्याख्या: रॉलेट ऐक्ट के विरोध में 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल हुई, जिसके परिणामस्वरूप जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) हुआ, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को नई ऊर्जा दी।

    15. उत्तर: b) मार्शल लॉ लागू और दमन बढ़ा
      व्याख्या: जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद पंजाब में मार्शल लॉ लागू किया गया, और ब्रिटिश दमन बढ़ा, जिसने भारतीयों में असंतोष और राष्ट्रवादी भावना को और प्रबल किया।

    16. उत्तर: a) सभाओं पर प्रतिबंध, राष्ट्रवादी सभाओं का दमन
      व्याख्या: 1907 का देशद्रोही सभा अधिनियम सभाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए लागू किया गया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रवादी सभाओं और आंदोलनों का दमन था।

    17. उत्तर: b) 1910, राष्ट्रवादी लेखकों को दंडित करना
      व्याख्या: 1910 का इंडियन प्रेस ऐक्ट राष्ट्रवादी लेखकों और प्रकाशनों को दंडित करने के लिए लागू किया गया, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित किया और असंतोष को बढ़ाया।

    18. उत्तर: b) 1917, तीनकठिया व्यवस्था समाप्त
      व्याख्या: चम्पारण सत्याग्रह 1917 में शुरू हुआ, और इसका प्रमुख परिणाम तीनकठिया व्यवस्था का समापन और किसानों को राहत था, जिसने गांधीजी को राष्ट्रीय नेता बनाया।

    19. उत्तर: b) 1918, लगान माफी की मांग
      व्याख्या: खेड़ा आंदोलन 1918 में शुरू हुआ, जब गुजरात के खेड़ा जिले में अधिक वर्षा से फसल नष्ट होने के बाद किसानों ने लगान माफी की मांग की।

    20. उत्तर: a) 1 जनवरी 1921, चौरी-चौरा घटना (5 फरवरी 1922)
      व्याख्या: असहयोग आंदोलन 1 जनवरी 1921 को शुरू हुआ और 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण 12 फरवरी 1922 को गांधीजी द्वारा स्थगित कर दिया गया।


    ये प्रश्न अत्यंत कठिन हैं और तिथियों, दमनकारी कानूनों, प्रमुख सुधारकों, आंदोलनों, रॉलेट ऐक्ट, और जलियांवाला बाग हत्याकांड पर केंद्रित हैं। यदि आपको और प्रश्न या किसी विशेष खंड पर केंद्रित प्रश्न चाहिए, तो कृपया बताएँ।


    5. भारत में राष्ट्रवाद: महत्वपूर्ण घटनाएँ व संगठन पर आधारित 10 अत्यंत कठिन प्रश्न (BPSC TRE 4)

    प्रश्न:

    1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किस तिथि को हुई, और इसका प्रारंभिक उद्देश्य क्या था?
      a) 28 दिसंबर 1885, विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना
      b) 30 दिसंबर 1906, पूर्ण स्वराज की मांग
      c) 17 अक्टूबर 1919, साम्प्रदायिक एकता को बढ़ावा देना
      d) 12 मार्च 1930, ब्रिटिश शासन का विरोध

    2. 1916 के लखनऊ समझौते की तिथि और इसका राष्ट्रीय आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या था?
      a) 1915, स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा
      b) 1916, हिंदू-मुस्लिम एकता और साझा राजनीतिक मांग
      c) 1919, रॉलेट ऐक्ट का विरोध
      d) 1920, असहयोग आंदोलन की शुरुआत

    3. होमरूल लीग आंदोलन (1915-17) की स्थापना किस संगठन के तहत हुई, और इसके प्रमुख नेता कौन थे?
      a) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, गांधीजी और नेहरू
      b) स्वतंत्र संगठन, एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक
      c) मुस्लिम लीग, मोहम्मद अली जिन्ना
      d) स्वराज पार्टी, चित्तरंजन दास

    4. गदर पार्टी की स्थापना कब और किसके द्वारा हुई, और इसका प्राथमिक लक्ष्य क्या था?
      a) 1913, लाला हरदयाल, क्रांतिकारी सशस्त्र विद्रोह
      b) 1916, सुभाष चंद्र बोस, अहिंसक आंदोलन
      c) 1919, गांधीजी, सत्याग्रह
      d) 1920, जयप्रकाश नारायण, समाजवादी सुधार

    5. स्वराज पार्टी की स्थापना की तिथि और इसका गठन क्यों हुआ?
      a) 1923, असहयोग आंदोलन की वापसी से निराशा
      b) 1919, रॉलेट ऐक्ट के विरोध में
      c) 1928, साइमन कमीशन के विरोध में
      d) 1930, दांडी यात्रा के समर्थन में

    6. खिलाफत आंदोलन की शुरुआत की तिथि और इसका राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान क्या था?
      a) 17 अक्टूबर 1919, हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा
      b) 6 अप्रैल 1919, स्वराज की मांग
      c) 1 जनवरी 1921, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
      d) 12 मार्च 1930, नमक कानून का उल्लंघन

    7. साइमन कमीशन (1927) के गठन का उद्देश्य और इसका विरोध क्यों हुआ?
      a) संवैधानिक सुधारों की समीक्षा, इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं
      b) पूर्ण स्वराज की मांग, यह ब्रिटिश शासन का समर्थन करता था
      c) आर्थिक सुधार, यह भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देता था
      d) धार्मिक एकता, यह साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देता था

    8. नेहरू रिपोर्ट (1928) की तिथि और इसका प्रमुख प्रस्ताव क्या था?
      a) 1927, पूर्ण स्वराज की मांग
      b) 1928, भारत को डोमिनियन स्टेटस
      c) 1919, रॉलेट ऐक्ट का विरोध
      d) 1930, नमक कानून का उल्लंघन

    9. असहयोग आंदोलन (1920-22) की शुरुआत की तिथि और इसका समापन किस घटना के कारण हुआ?
      a) 1 जनवरी 1921, चौरी-चौरा घटना (5 फरवरी 1922)
      b) 6 अप्रैल 1919, जलियांवाला बाग हत्याकांड
      c) 17 अक्टूबर 1919, खिलाफत आंदोलन
      d) 12 मार्च 1930, गांधी-इरविन समझौता

    10. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना कब और किसके द्वारा हुई, और इसका प्राथमिक उद्देश्य क्या था?
      a) 1925, केशव बलिराम हेडगेवार, हिंदू राष्ट्र और अनुशासन
      b) 1915, मदन मोहन मालवीय, धार्मिक सुधार
      c) 1930, सुभाष चंद्र बोस, सशस्त्र क्रांति
      d) 1920, लाला लाजपत राय, स्वराज की मांग


    5. उत्तर और व्याख्या:

    1. उत्तर: a) 28 दिसंबर 1885, विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना
      व्याख्या: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बंबई में गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई। इसका प्रारंभिक उद्देश्य भारत के विभिन्न संगठनों में एकता स्थापित करना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, और शासन में सुधार के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना था।

    2. उत्तर: b) 1916, हिंदू-मुस्लिम एकता और साझा राजनीतिक मांग
      व्याख्या: 1916 का लखनऊ समझौता कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुआ, जिसने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया और साझा राजनीतिक मांगों, जैसे स्वशासन, को आगे बढ़ाया। यह राष्ट्रीय आंदोलन में एकता का प्रतीक बना।

    3. उत्तर: b) स्वतंत्र संगठन, एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक
      व्याख्या: होमरूल लीग आंदोलन (1915-17) एक स्वतंत्र संगठन के रूप में शुरू हुआ, जिसका नेतृत्व एनी बेसेन्ट और बाल गंगाधर तिलक ने किया। इसका उद्देश्य स्वराज की मांग को जन-जन तक पहुँचाना था।

    4. उत्तर: a) 1913, लाला हरदयाल, क्रांतिकारी सशस्त्र विद्रोह
      व्याख्या: गदर पार्टी की स्थापना 1913 में लाला हरदयाल द्वारा अमेरिका और कनाडा में हुई। इसका प्राथमिक लक्ष्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।

    5. उत्तर: a) 1923, असहयोग आंदोलन की वापसी से निराशा
      व्याख्या: स्वराज पार्टी की स्थापना 1923 में चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा की गई, क्योंकि असहयोग आंदोलन (1922) की अचानक वापसी से निराशा हुई। इसका उद्देश्य विधानसभाओं में प्रवेश कर ब्रिटिश शासन को बाधित करना था।

    6. उत्तर: a) 17 अक्टूबर 1919, हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा
      व्याख्या: खिलाफत आंदोलन की शुरुआत 17 अक्टूबर 1919 को हुई, जब प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार और खलीफा की सत्ता से वंचना ने भारतीय मुसलमानों में असंतोष पैदा किया। गांधीजी ने इसे असहयोग आंदोलन से जोड़कर हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया।

    7. उत्तर: a) संवैधानिक सुधारों की समीक्षा, इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं
      व्याख्या: साइमन कमीशन (1927) का गठन 1919 के भारत शासन अधिनियम की समीक्षा के लिए हुआ, लेकिन इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था, जिसके कारण इसका तीव्र विरोध हुआ और “Simon Go Back” का नारा दिया गया।

    8. उत्तर: b) 1928, भारत को डोमिनियन स्टेटस
      व्याख्या: नेहरू रिपोर्ट (1928) में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारत को डोमिनियन स्टेटस देने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन इसे सभी दलों ने स्वीकार नहीं किया, और यह सांप्रदायिकता को बढ़ाने का कारण बनी।

    9. उत्तर: a) 1 जनवरी 1921, चौरी-चौरा घटना (5 फरवरी 1922)
      व्याख्या: असहयोग आंदोलन 1 जनवरी 1921 को शुरू हुआ और 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण 12 फरवरी 1922 को गांधीजी द्वारा स्थगित कर दिया गया।

    10. उत्तर: a) 1925, केशव बलिराम हेडगेवार, हिंदू राष्ट्र और अनुशासन
      व्याख्या: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 1925 में नागपुर में केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई। इसका प्राथमिक उद्देश्य हिंदू युवकों को हिंदू राष्ट्र, अनुशासन, और चारित्रिक दृढ़ता के लिए तैयार करना था।


    ये प्रश्न अत्यंत कठिन हैं और महत्वपूर्ण घटनाओं (जैसे लखनऊ समझौता, साइमन कमीशन, नेहरू रिपोर्ट, असहयोग आंदोलन) और संगठनों (जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, स्वराज पार्टी, गदर पार्टी, RSS) पर केंद्रित हैं। यदि आपको और प्रश्न या किसी विशेष खंड पर केंद्रित प्रश्न चाहिए, तो कृपया बताएँ।

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